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कानपुर देहात में सनसनी: नोन नदी में मछली पकड़ने गए थे युवक, दलदल से निकला कुछ ऐसा कि उड़ गए होश!

जसवापुर-गजनेर के बीच खड्ड में पंपिंग सेट लगाते ही मचा हड़कंप; पुलिस ने चारों तरफ बनाया सुरक्षा घेरा

सरवनखेड़ा (कानपुर देहात) के गजनेर थाना क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां गजनेर-रायपुर मुख्य मार्ग पर स्थित जसवापुर और गजनेर गांव के बीच नोन नदी के पुल के पास एक गहरे खड्ड में सेना में इस्तेमाल होने वाला रॉकेट लॉन्चर (मोटार शेल) जैसा बम मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने एहतियात के तौर पर रॉकेट लॉन्चर के चारों तरफ सुरक्षा घेरा (कॉर्डन ऑफ) बना दिया है और सेना व बम निरोधक दस्ते (BDDS) का इंतजार किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, बुधवार दोपहर को जसवापुर गांव के रहने वाले युवक छोटे, मोहित कुमार, सुमित और सचिन नोन नदी के पुल के बगल में बने गहरे गड्ढे में पंपिंग सेट लगाकर मछली पकड़ने के लिए पानी बाहर निकाल रहे थे। पानी कम होने पर जैसे ही दलदल नजर आया, तो पंप के सेक्शन पाइप के पास युवकों को लोहे की एक संदिग्ध और भारी चीज दिखाई दी। युवक उसे गौर से देखने ही वाले थे कि तभी गजनेर बाजार से खरीदारी कर लौट रहे जसवापुर निवासी अनिल सोनकर की नजर उन पर पड़ी। वह सड़क से नीचे उतरकर मौके पर पहुंचे और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत गजनेर पुलिस को फोन पर सूचना दी।

पूर्व फौजी ने की पहचान, 1994 का बना है गोला

नदी में बम मिलने की अफवाह फैलते ही आसपास के गांवों के सैकड़ों लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गजनेर थाना पुलिस ने तुरंत उच्चाधिकारियों और फोरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया। सूचना मिलते ही सीओ सदर संजय कुमार सिंह और नायब तहसीलदार विक्रम सिंह भी जांच के लिए पहुंच गए। इसी बीच मौके पर पहुंचे एक पूर्व फौजी नरेंद्र सिंह ने गोले का निरीक्षण कर चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यह भारतीय सेना में इस्तेमाल होने वाला रॉकेट लॉन्चर (मोटार शेल) है, जो 1/20 गन का गोला है। यह वर्ष 1994 का बना हुआ है और पुराना होने के बावजूद काफी खतरनाक साबित हो सकता है।

इस संबंध में गजनेर थाना प्रभारी सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि मौके से एक मोटार शेल बरामद हुआ है। बम निरोधक दस्ते की टीम को बुला लिया गया है, जो मौके पर आकर इसे सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज करने की प्रक्रिया पूरी करेगी। फिलहाल, क्षेत्र के लोगों में इस बात को लेकर गहरी चर्चा और चिंता बनी हुई है कि आखिर सेना का यह घातक गोला बारूद इस नदी के दलदल में कैसे और कहां से आया, जो कि पुलिस जांच का एक बड़ा और गंभीर विषय है।


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