कानपुर, अमन यात्रा । धोखाधड़ी व गबन के आरोप में घिरे केनरा बैंक के प्रबंधक अजीत सिंह पाल ने मंगलवार दोपहर कल्याणपुर थानाक्षेत्र के आवास विकास केशवपुरम स्थित घर पर फांसी लगा ली। मकान मालिक ने फंदे पर लटका देख उनके स्वजन व बैंककर्मियों को जानकारी दी। इसके बाद परिवारवाले आकर तुरंत उन्हें अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस को मौके पर बैंक के एजीएम के लिए संबोधित एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें अजीत ने खुद को बेकसूर बताया है।

मानसिक रूप से थे परेशान

मूलरूप से काकादेव शास्त्रीनगर निवासी अजीत सिंह दिव्यांग थे। वह अपनी पत्नी सुनैना और तीन वर्षीय बेटी अनन्या के साथ केशवपुरम में किराये पर रहते थे और बिरहाना रोड स्थित केनरा बैंक में प्रबंधक थे। पुलिस के मुताबिक कुछ समय पहले बैंक में बीमा संबंधी पांच लाख रुपये के लेनदेन के मामले में उन पर गबन का आरोप लगा था। बैंक के अॉडिट में यह गड़बड़ी सामने आई थी। इसके बाद बैंक की क्षेत्रीय शाखा की ओर से जांच भी की जा रही थी। इसी वजह से अजीत मानसिक रूप से परेशान थे। उन्होंने ठीक से खाना पीना और सोना बंद कर दिया था।

पत्नी व बेटी को चाची के घर भेज लगाई फांसी

सोमवार को उन्होंने पत्नी व बेटी को शास्त्रीनगर निवासी चाचा उदय भान के घर भेजा था। मंगलवार दोपहर उन्होंने कमरे में फांसी लगा ली। मकान मालिक आए तो उन्होंने अजीत को फंदे से लटका देख शोर मचाया और पड़ोसियों की मदद से तुरंत उन्हें नीचे उतारकर पुलिस व स्वजनों को फोन किया। इसके बाद स्वजन आकर अजीत को कॉर्डियोलॉजी अस्पताल और फिर हैलट ले गए। जहां अजीत को मृत घोषित कर दिया गया। घटना से परिवार में कोहराम मच गया।

पुलिस ने कमरे की तलाशी ली तो अजीत का लिखा गया सुसाइड नोट बरामद हुआ। कल्याणपुर थाना प्रभारी जनार्दन प्रताप सिंह ने बताया कि अजीत सिंह अपने खिलाफ हो रही किसी विभागीय जांच की वजह से तनाव में थे। संभवत: इसी वजह से उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया है। सुसाइड नोट में उन्होंने किसी पर भी कोई आरोप नहीं लगाया है, लेकिन अगर स्वजन कोई तहरीर देते हैं तो जांच कराकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सुसाइड नोट में लिखी ये बातें

अजीत ने खुदकुशी से पहले बैंक के एजीएम के नाम सुसाइड नोट भी लिखा था। उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा- मैंने कभी कोई गलत काम बैंक के नुकसान या अपनी भलाई के लिए कभी नहीं किया। परंतु ये मेरी गलतियां थीं, जो मेरे द्वारा हुईं। पर मेरा कोई भी इरादा गलत नहीं था और न ही मेरी शाखा का कोई कर्मचारी इसमें इरादतन शामिल था। मैं चोर नहीं हूं। गलतियों के लिए क्षमा कीजिएगा। निवेदन है कि मेरे घरवालों को परेशान मत करिएगा। अपने परिवार से यही कह रहा हूं कि न मैं अच्छा बेटा बन सका, न पति और न ही पिता। आप सबको मझधार में छोड़कर जा रहा हूं। मुझे माफ कर देना। मोनू (भाई) सबका ध्यान रखना।