निर्भय सिंह यादव , पुखरायां। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण जब अपने दोस्तों के साथ खेल रहे थे तब उन्हें मारने के लिए कंसने कालिया नामक नाग को भेजा। उसने पहले गांव वालों को परेशान किया। लोग सहम गए। एक दिन जब भगवान कृष्ण खेल रहे थे तो उनकी गेंद नदी में गिर गई। जब वे उसे लाने के लिए नदी में उतरे तो कालिया ने उनपर आक्रमण कर दिया। देखते ही देखते कालिया की जान पर बन आई। भगवान श्रीकृष्ण से कालिया ने माफी मांगते हुए गांव वालों को कभी हानि नहीं पहुंचाने का वचन दिया। कालिया नाग पर बालकृष्ण की विजय को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। मंगलवार को नाग पंचमी (गुड़िया) का त्योहार परंपरागत ढंग से मनाया गया। गांव-कस्बों में सुबह बच्चों ने कपड़े से बनी कुड़ियों को पीट कर आनंद ले रहे हैं। वहीं शाम को महिलाओं ने घरों में नाग देवता को पीने के लिए जगह-जगह दूध रखा।
बता दें कि नाग पंचमी के त्योहार पर गांव में जगह-जगह ग्रामीण दंगल के भी आयोजन किए जाते हैं। जिसमें 1 गांव एवं क्षेत्र के युवको और किशोरों के द्वारा कुश्ती कला, ऊंची कूद, लंबी कूद, दौड़ और अन्य शारीरिक व्यायाम के प्रदर्शन किए जाते हैं जिससे युवाओं में नया जोश और कुछ कर गुजरने का जज्बा भरने कार्य भी माना जाता है जिससे युवा अपनी क्षमता दिखाने के लिए अमनकुछ ना कुछ नया कर्तव्य करते रहते हैं जिससे ग्रामीणों में मनोरंजन के साथ-साथ परंपरा को भी कायम रखने का भी काम कर रहे हैं आज यदि देश में भारतीय परंपरा या भारतीय संस्कृति जीवित है तो उसके लिए ग्रामीणों को प्राथमिकता देने जैसा सरकार के द्वारा प्रशंसनीय कार्य माना जाता है
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