गरमा-गरम खाना बनाने वाली रसोइयों को नहीं मिला 6 माह से मानदेय
जनपद में करीब 4507 से अधिक रसोईया कार्यरत हैं जिन्हें 6 माह से मानदेय नहीं दिया गया है। दो हजार रुपए मिलने वाला मानदेय अब तक उन्हें नहीं मिला है। ये रसोइयां परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले डेढ़ लाख से अधिक बच्चों का पेट भर रही हैं लेकिन इस बार इनकी दिवाली तक फीकी रही। मिड-डे-मील योजना के तहत स्कूलों में बच्चों के लिए खाना बनाने वाली रसोईया स्वयं ही भूखी रह रही हैं।

- मानदेय सिर्फ 2 हजार वो भी नसीब नहीं
कानपुर देहात। जनपद में करीब 4507 से अधिक रसोईया कार्यरत हैं जिन्हें 6 माह से मानदेय नहीं दिया गया है। दो हजार रुपए मिलने वाला मानदेय अब तक उन्हें नहीं मिला है। ये रसोइयां परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले डेढ़ लाख से अधिक बच्चों का पेट भर रही हैं लेकिन इस बार इनकी दिवाली तक फीकी रही। मिड-डे-मील योजना के तहत स्कूलों में बच्चों के लिए खाना बनाने वाली रसोईया स्वयं ही भूखी रह रही हैं।

जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में (एमडीएम) के तहत स्कूलों में बच्चों के लिए खाना बनाकर परोसने के लिए लगभग 4507 रसोइयां तैनात हैं। बीते 6 माह से इन रसोइयों को मानदेय की एक कौड़ी नहीं मिली है जिसके चलते रसोइयों के बच्चे तक भुखमरी की कगार पर हैं। इन रसोइयों को 2000 रुपए प्रति महीने मानदेय मिलता है लेकिन इन गरीबों की यह छोटी राशि भी शासन समय से मुहैया नहीं कर पाता है। बता दें कि जिले में बेसिक शिक्षा परिषद के 1925 सरकारी परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत 1.56 लाख छात्र-छात्राओं का पेट समय से भरने वाली रसोइयों के बच्चे इस दीपावली मिठाइयां तो दूर शायद भोजन से भी वंचित रहे होगें जिसका एकमात्र कारण होगा शासन, जहां से बीते 6 माह से इन रसोइयों को मानदेय की एक कौड़ी नहीं मिली है। जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में लाखों बच्चों को गरमा-गरम खाना बनाकर परोसने के लिए लगभग 4507 रसोइयां तैनात हैं जो पूरी लगन-मेहनत के साथ ड्यूटी कर बच्चों के लिए हर रोज खाना तैयार करती हैं।

12 में से सिर्फ 10 महीने का ही मिलता है मानदेय-
इन रसोइयों को ग्रीष्मावकाश के दो महीने मई-जून को छोड़कर 10 महीने का मानदेय दिया जाता है। 2022-23 में इन रसोइयों को मार्च, अप्रैल और मई-जून को छोड़ दिया जाए तो अब तक जुलाई, अगस्त और सितंबर का मानदेय भी नसीब नहीं हुआ है। कई ऐसी रसोईया भी हैं जिनके खाते का विवरण बीआरसी स्तर से गलत फीड कर दिया गया है जिससे उन्हें कई साल से मानदेय नहीं मिला है। वे मानदेय के लिए आए दिन बीआरसी केंद्रों के चक्कर लगाया करती हैं लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। कहने को तो इन रसोइयों को 2000 रुपए प्रति महीने मानदेय मिलता है जोकि इस महंगाई में कुछ भी नहीं है लेकिन इन गरीबों की यह छोटी सी राशि भी शासन ने समय से मुहैया नहीं करवाई है। वहीं समय से मानदेय जारी न होने से सभी रसोइयों में नाराजगी है।
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