अकबरपुर महाविद्यालय परिसर में पुर्तगाल के गणितज्ञ प्रोफेसर टियागा ने दिया अतिथि व्याख्यान
अकबरपुर महाविद्यालय में लिस्बन विश्वविद्यालय पुर्तगाल के प्रोफेसर जेकेबी टियागा डी ओलेवेरा ने गणित विषय गणित के इतिहास पर आमंत्रित व्याख्यान दिया तथा गणित की जीवन के क्षेत्र में उपयोगिता पर प्रकाश डाला ।

- जीवन के अनेक क्षेत्रों में है गणित की उपयोगिता
सुशील त्रिवेदी, कानपुर देहात : अकबरपुर महाविद्यालय में लिस्बन विश्वविद्यालय पुर्तगाल के प्रोफेसर जेकेबी टियागा डी ओलेवेरा ने गणित विषय गणित के इतिहास पर आमंत्रित व्याख्यान दिया तथा गणित की जीवन के क्षेत्र में उपयोगिता पर प्रकाश डाला ।
प्रोफेसर टियागा ने कहा कि गणित का क्षेत्र अत्यंत विस्तृत है तथा इसके सूत्रों से अनेक खगोलीय घटनाओं एवं ज्योतिष विज्ञान की व्याख्या सरलता पूर्वक की जा सकती है। ज्योतिष विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान, पदार्थ विज्ञान आदि सभी क्षेत्रों में ही नहीं अपितु जीवन के हर क्षेत्र में गणित की विशेष उपयोगिता है। उन्होंने गणित के विकास एवं उसके अन्य विषयों के साथ अंतर-सम्बन्ध पर तथ्यपरक प्रस्तुतीकरण दिया।
कार्यक्रम के अति विशिष्ट अतिथि के रूप में अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद के पूर्व कुलपति प्रोफेसर राम विलास मिश्रा का व्याख्यान हुआ। उन्होंने गणित के क्षेत्र में देश व विदेश में किए गए महत्वपूर्ण कार्यों की चर्चा करते हुए बताया कि गणित को समझने के लिए उसके व्यावहारिक प्रयोग को समझना अत्यंत आवश्यक है। दैनिक जीवन का ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है जो गणित से अछूता हो। प्रोफेसर रामविलास मिश्रा ने गणित और उसके दर्शन पर प्रकाश डाला।गणित के अलावा जितने भी विषय हैं उन सब में किसी न किसी रूप में गणित का उपयोग देखने को मिलता है। भारत की अपनी समृद्ध ज्ञान परंपरा रही है जिसको समझना और उसे आगे बढ़ाने का उत्तरदायित्व हमारी नई पीढ़ी का है। उन्होंने सरल शब्दों में समझाया कि दो लड़के और तीन लड़कियां मिलकर कभी भी पांच लड़के अथवा पांच लड़कियां नहीं हो सकते। इसी प्रकार एक टीवी और एक माइक मिलकर दो टीवी या दो माइक नहीं हो सकते जबकि दो लड़के और तीन लड़के मिलकर पांच लड़के हो सकते हैं तथा एक टीवी और एक टीवी मिलकर दो टीवी हो सकते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि जब तक वस्तुओं का स्वरूप समान नहीं होगा तब तक उनको जोड़ा नहीं जा सकता है। यह गणित में योग का एक सार्वभौमिक सिद्धांत है। इसके साथ ही उन्होंने पाइथागोरस प्रमेय, लॉरेंस लॉ आदि पर प्रकाश डाला तथा बोधायन, ब्रह्मगुप्त, आर्यभट्ट, भास्कर प्रथम, भास्कर द्वितीय, रामानुजन आदि के गणित के क्षेत्र में योगदान पर प्रकाश डाला।
उन्होंने गणित के सूत्रों एवं प्रमेय को रोचक ढंग से प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों से संवाद किया तथा बताया कि गणित एक रोचक एवं आनंद देने वाला विषय है कुछ लोग अज्ञानता के चलते इसे नीरस एवं बोझिल विषय समझने लगते हैं। प्रतिभागियों ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उनको गणित विषय से डर लगता था परंतु इस व्याख्यान के बाद उनका डर दूर हुआ है एवं उन्हें गणित की उपयोगिता एवं रोचकता समझ में आ गई है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में लखनऊ विश्वविद्यालय के गणित विभाग के प्रोफेसर डॉ. एनवीसी शुक्ला ने ज्यामिति के विकास एवं उसके अनुप्रयोग पर शोधपरक प्रस्तुतिकरण दिया तथा गणित के क्रमिक विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्योमेट्री प्रमुख रूप से यूक्लिड की देन है। इसके साथ ही उन्होंने भारत के महान गणितज्ञों के विषय में चर्चा करते हुए उनके काल खण्ड, रचनाओं एवं गणित के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के विषय में चर्चा की तथा भारतीय गणितीय ज्ञान की वर्तमान युग में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर ए.सी. पाण्डेय ने बताया कि डॉ. शुक्ला के निर्देशन में उन्होंने गणित विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। अगर प्रोफेसर शुक्ला का कुशल निर्देशन न प्राप्त हुआ होता तो शायद वह प्रोफेसर से प्राचार्य तक की सफलताओं को आसानी से प्राप्त न कर पाते। उन्होंने बताया कि गणित को रोचक ढंग से प्रस्तुतीकरण का तरीका उनके शोध निर्देशक प्रोफेसर शुक्ला की ही देन है।
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की प्रोफेसर अंजू शुक्ला ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के उप प्राचार्य डॉ. उमेश चन्द्र तिवारी ने किया। कार्यक्रम के सफल संचालन में महाविद्यालय के शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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