अमरौधा विकासखंड की 9 ग्राम पंचायतें क्षय रोग मुक्त घोषित, प्रधानों को मिलेगा सम्मान
मरौधा विकासखंड क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है, जहाँ 9 ग्राम पंचायतें वर्ष 2024-25 के लिए क्षय रोग (टीबी) से मुक्त घोषित की गई हैं। यह सफलता स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

- 3 अप्रैल को पंचायत कार्यालय में आयोजित होगा सम्मान समारोह
अमरौधा विकासखंड क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है, जहाँ 9 ग्राम पंचायतें वर्ष 2024-25 के लिए क्षय रोग (टीबी) से मुक्त घोषित की गई हैं। यह सफलता स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
घोषणा और सम्मान समारोह:
अमरौधा पंचायत कार्यालय में आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता में, एडीओ पंचायत राम प्रकाश पाठक और विकासखंड अमरौधा के प्रभारी बलवीर प्रजापति ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा की। उन्होंने बताया कि 3 अप्रैल, गुरुवार को सुबह 11 बजे अमरौधा के सभागार में एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। इस समारोह में, स्वास्थ्य विभाग की क्षय रोग टीम के कृष्ण चंद्रम झा द्वारा इन 9 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को टीबी मुक्त होने का प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
सम्मानित होने वाली ग्राम पंचायतें और उनके प्रधान:
- लखनापुर (प्रधान: अजय यादव)
- रनिया (प्रधान: योगेश शुक्ला)
- सलारपुर (प्रधान: कृपा शंकर निषाद)
- बम्हरौली घाट (प्रधान: विनय कुमार गुप्ता)
- सुजौर (प्रधान: पुष्पा दिवाकर)
- हराहरा (प्रधान: बालादीन)
- देवराहट (प्रधान: शकुंतला देवी)
- पुरैनी (प्रधान: शारदा देवी)
कार्यक्रम का उद्देश्य:
इस सम्मान समारोह का मुख्य उद्देश्य उन ग्राम प्रधानों को सम्मानित करना है जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में टीबी उन्मूलन के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह कार्यक्रम अन्य ग्राम पंचायतों को भी टीबी मुक्त होने के लिए प्रेरित करेगा।
स्थानीय प्रशासन का योगदान:
स्थानीय प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर टीबी उन्मूलन के लिए कई जागरूकता अभियान चलाए और ग्रामीणों को टीबी के लक्षणों और उपचार के बारे में शिक्षित किया। इसके अलावा, उन्होंने टीबी रोगियों को मुफ्त दवाएं और अन्य आवश्यक सहायता प्रदान की।
स्वास्थ्य विभाग का योगदान:
स्वास्थ्य विभाग ने टीबी रोगियों की पहचान करने और उनका इलाज करने के लिए नियमित जांच अभियान चलाए। उन्होंने टीबी के प्रसार को रोकने के लिए ग्रामीणों को टीकाकरण भी प्रदान किया।
समुदाय की भागीदारी:
स्थानीय समुदाय ने भी टीबी उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्रामीणों ने टीबी के लक्षणों वाले लोगों को तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने टीबी रोगियों को सामाजिक बहिष्कार से बचाने में भी मदद की। यह उपलब्धि स्थानीय समुदाय के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पण को दर्शाती है। यह उन सभी लोगों के लिए गर्व का क्षण है जिन्होंने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अथक प्रयास किया है।
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