कानपुर देहात। बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में सालों से प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत सहायक अध्यापकों ने प्रधानाध्यापक का वेतन दिए जाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। गोरखपुर के प्राइमरी स्कूल में 2010 से प्रभारी प्रधानाध्यापक रहे त्रिपुरारी दुबे और 2005 से प्रभारी प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी उठा रहे कुछ अन्य शिक्षकों ने हाईकोर्ट में चार नवंबर 2022 को याचिका की थी। कई शिक्षक 12 और 17 साल से जिम्मेदारी निभा रहे अध्यापकों का तर्क है कि प्रधानाध्यापक का काम करने के बावजूद उन्हें सहायक अध्यापक का वेतन मिल रहा है।
शिक्षकों के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि जब याचिकाकर्ताओं को इतने लंबे समय तक प्रधानाध्यापक के रूप में काम करने की अनुमति दी गई है तो उन्हें पद के अनुरूप वेतन भी मिलना चाहिए। कोर्ट ने इस मामले का फाइनल आदेश 15 मई 2024 को जारी कर दिया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है की प्रभारी प्रधानाध्यापकों को प्रधानाध्यापक का वेतन प्रदान किया जाए। बताते चलें प्रभारी प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी उठा रहे सहायक अध्यापकों को हर महीने औसतन चार हजार रुपये का नुकसान हो रहा है।
पदोन्नति न होने के कारण उन्हें एक इंक्रीमेंट नहीं मिल पाता। प्रमोशन शिक्षकों का मौलिक अधिकार है। न होने से उन्हें वित्तीय नुकसान हो रहा है। अवैधानिक रूप से इनसे प्रधानाध्यापक का काम लिया जा रहा है। जो भी अड़चनें हों सरकार को उन्हें दूर करके शिक्षकों का तत्काल प्रमोशन करना चाहिए।
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