एमडीएम वितरण प्रत्येक दशा में मध्यावकाश अवधि में ही कराए, नहीं तो होगी करवाई : रिद्धि पाण्डेय
बच्चे स्कूल में नियमित आएं और उनका पोषण स्तर भी सामान्य रहे इस आशय से सरकार ने स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की शुरुआत की है। पोषण तत्व बरकरार रखने के लिए बच्चों को मेनू के अनुसार भोजन दिया जाना है किंतु कुछ स्कूलों में मेनू नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। मध्यान्ह भोजन का संचालन स्कूल के प्रधानाध्यापक एवं ग्राम प्रधान के द्वारा किया जाता है।

अमन यात्रा ,कानपुर देहात । बच्चे स्कूल में नियमित आएं और उनका पोषण स्तर भी सामान्य रहे इस आशय से सरकार ने स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की शुरुआत की है। पोषण तत्व बरकरार रखने के लिए बच्चों को मेनू के अनुसार भोजन दिया जाना है किंतु कुछ स्कूलों में मेनू नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। मध्यान्ह भोजन का संचालन स्कूल के प्रधानाध्यापक एवं ग्राम प्रधान के द्वारा किया जाता है। वर्षों से चली आ रही मध्यान्ह भोजन योजना को कुछ स्कूलों में अपने मनमाने तरीके से चलाया जा रहा है।
जिले के सभी सरकारी स्कूलों में यह योजना चल रही है। रसोइयों के माध्यम से बच्चों को गर्म भोजन पकाकर मध्यावकाश में खिलाया जाता है लेकिन कई स्कूलों में बच्चों को मध्यावकाश के बाद मध्यान भोजन वितरित किया जाता है इसकी शिकायतें जब उच्च स्तर पर गई तो निदेशक विजय किरन आनंद ने सभी जनपदों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया। उन्होंने आदेश में स्पष्ट किया की स्कूलों में भोजन पकाने की व्यवस्था इस प्रकार से की जाए कि बच्चों को मध्यान्ह अवकाश के समय भोजन प्राप्त हो सके। इस व्यवस्था में ढिलाई होने पर संबंधित प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारी को दोषी मानते हुए कार्यवाही की जाएगी। देर में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था करने से छात्र छात्राओं का पठन-पाठन कार्य प्रभावित हो रहा है।
बच्चों में बुनियादी साक्षरता एवं अंकगणितीय दक्षता सुनिश्चित करने हेतु निपुण भारत मिशन प्राथमिकता के आधार पर पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है। अत: छात्र छात्राओं को पठन-पाठन हेतु अधिकतम समय सुलभ कराना नितांत आवश्यक है ताकि निपुण भारत के लक्ष्यों को जल्द से जल्द प्राप्त किया जा सके। मध्यावकाश के बाद छात्र-छात्राएं कक्षा में पठन-पाठन हेतु समय से उपलब्ध हो सके इसलिए यह नितांत आवश्यक है कि मध्यावकाश में ही बच्चों को मध्यान्ह भोजन कराया जाए।
बेसिक शिक्षा अधिकारी रिद्धी पाण्डेय ने बताया कि इस संदर्भ में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है अगर कहीं पर भी निरीक्षण में यह पाया जाता है कि मध्यावकाश के बाद या पहले बच्चों को मध्यान भोजन कराया जा रहा है तो उस पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। निर्धारित समय के अंतर्गत ही विद्यार्थियों को मध्यान भोजन कराना होगा।
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