कानपुर में सर्दी व शीत लहर से कांपा दिल और दिमाग, पांच लोगों की हुई मौत, लगातार भर्ती हो रहे मरीज
सर्दी के साथ शीत लहर का कहर बढ़ गया है। सर्दी और शीतलहर से दिल-दिमाग कांप उठा है। बीते 24 घंटे में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक (लकवा) से पांच की मौत हो गई। वहीं, सर्दी दिल, मधुमेह व हाइपरटेंशन के पुराने मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।

कानपुर, अमन यात्रा । सर्दी के साथ शीत लहर का कहर बढ़ गया है। सर्दी और शीतलहर से दिल-दिमाग कांप उठा है। बीते 24 घंटे में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक (लकवा) से पांच की मौत हो गई। वहीं, सर्दी दिल, मधुमेह व हाइपरटेंशन के पुराने मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। यही वजह है कि शुक्रवार देर शाम तक लक्ष्मीपत सिंहानिया हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलाजी) की इमरजेंसी में 66 मरीज भर्ती हुए हैं। इसी तरह, ब्रेन स्ट्रोक की चपेट में आकर एलएलआर अस्पताल (हैलट) इमरजेंसी 16 मरीज भर्ती हुए हैं।
हृदय रोग संस्थन में बर्रा के 79 वर्षीय श्याम शंकर को स्वजनों ने हार्ट अटैक होने पर भर्ती कराया था। इलाज के दौरान उनकी सांसें थम गईं। इसी तरह नौबस्ता निवासी 67 वर्षीय अच्छे लाल भी गुरुवार देर रात सीने में तेज दर्द के बाद बेसुध हो गए। उन्हें स्वजन हृदय रोग संस्थान की इमरजेंसी लेकर आए थे। जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसी तरह बिल्हौर की 59 वर्षीय शिवरानी कश्यप को हार्ट अटैक पडऩे पर स्वजनों ने संस्थान में भर्ती कराया था। डाक्टरों के मुताबिक अटैक गंभीर था, जिससे प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। हृदय रोग संस्थान के निर्देशक प्रो. विनय कृष्णा का कहना है कि शुक्रवार देर शाम तक इमरजेंसी में 66 मरीज भर्ती हुए हैं।
ब्रेन स्ट्रोक के 16 मरीज हुए भर्ती
एलएलआर अस्पताल की इमरजेंसी में ब्रेन स्ट्रोक के 16 मरीज भर्ती हुए हैं। उसमें से दो शुक्रवार सुबह मौत हो गई। उसमें फतेहपुर के जहानाबाद के 77 वर्षीय मो. फजल और घाटमपुर के 57 वर्षीय आनंद कुमार हैं। मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. रिचा गिरि का कहना है कि अनियंत्रित मधुमेह व ब्लड प्रेशर वाले ही ब्रेन स्ट्रोक की चपेट में आ रहे हैं।
बच्चों की बढऩे लगी है संख्या
एलएलआर के बाल रोग अस्पताल और बाल रोग की ओपीडी में सर्दी-खांसी और जुकाम पीडि़त बच्चे आने लगे हैं। उनमें से निमोनिया व कोल्ड डायरिया से पीडि़त बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत राव का कहना है कि मौसम में बदलाव को देखते हुए बच्चों को अच्छी तरह कपड़े पहनाएं। उन्हें ताजा खाना ही खिलाएं। गुनगुना पानी व दूध ही पिलाएं।
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