इसके साथ ही उन्होंने कहा, “कुछ केंद्र सरकार के मंत्री और बीजेपी नेता कह रहे हैं कि किसान राष्ट्र-विरोधी हैं. कई पूर्व सैनिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी, गायक, मशहूर हस्तियां, डॉक्टर, व्यापारी किसानों का समर्थन कर रहे हैं. बीजेपी से पूछना चाहते हैं कि क्या ये सभी लोग भी देशद्रोही हैं?”
अरविंद केजरीवाल ने कहा, “कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों की सभी मांगों को केंद्र को तुरंत स्वीकार करना चाहिए और एमएसपी की गारंटी के लिए विधेयक लाना चाहिए. केंद्र को अहंकार छोड़ देना चाहिए और किसान जिन तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं उन्हें रद्द कर देना चाहिए.” मुख्यमंत्री ने डिजिटल संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये बातें कही.
इस बीच भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत ने कहा कि हमें नजर रखने की जरूरत है ताकि कोई गलत तत्व हमारे बीच न हों. हमारे सभी युवाओं को सतर्क रहने की जरूरत है. अगर सरकार बात करना चाहती है तो हम एक समिति गठित करेंगे और आगे का निर्णय लेंगे.
वहीं किसान नेता जसबीर सिंह ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री से आज मिलने वाले 90 लोगों का खेती से कोई लेना-देना नहीं है. 10 किसान जो बैठक में उपस्थित थे उनके पास अन्य व्यवसाय भी हैं. उन्हें उत्तराखंड से एक राजनीतिक नेता द्वारा यहां लाया गया.
गौरतलब है कि केंद्र सरकार जहां तीनों कृषि कानूनों को कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश कर रही है, वहीं प्रदर्शनकारी किसानों ने आशंका जताई है कि नये कानूनों से एमएसपी और मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और और वे बड़े कॉरपोरेट की दया पर निर्भर हो जाएंगे.
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