क्षेत्राधिकारी भोगनीपुर तनु उपाध्याय से सकीना गुप्ता की हुई शिष्टाचार भेंट
क्षेत्राधिकारी भोगनीपुर तनु उपाध्याय से सकीना गुप्ता की हुई शिष्टाचार भेंट। मालूम हो कि एक सपना अपने जीवन में हर कोई कुछ बनकर बहुत कुछ नया करने का देखता है पर समय और हालात अनुकूल न होने के कारण वह अपना सपना पूरा नहीं कर पाती , वह सपना अधूरा रह जाता है पर जो सपना आपने कभी देखा हो वह अचानक किसी व्यक्तित्व में नजर आ जाए और आपको अपनी छवि उसमें नजर आ जाए तो वह पल बहुत ही यादगार बन जाता है जैसे यूपी दिवस के अवसर पर एसआरजी के कार्यक्रम में जिलाधिकारी महोदया को एक छोटी सी बिटिया प्रिया में अपना प्रतिरूप दिखा तो उन्होंने प्रिया को बड़े ही प्यार से अपने गले लगा लिया था जिलाधिकारी महोदया के लिए वह लम्हा हमेशा यादगार रहेगा।

अमन यात्रा, भोगनीपुर। क्षेत्राधिकारी भोगनीपुर तनु उपाध्याय से सकीना गुप्ता की हुई शिष्टाचार भेंट। मालूम हो कि एक सपना अपने जीवन में हर कोई कुछ बनकर बहुत कुछ नया करने का देखता है पर समय और हालात अनुकूल न होने के कारण वह अपना सपना पूरा नहीं कर पाती , वह सपना अधूरा रह जाता है पर जो सपना आपने कभी देखा हो वह अचानक किसी व्यक्तित्व में नजर आ जाए और आपको अपनी छवि उसमें नजर आ जाए तो वह पल बहुत ही यादगार बन जाता है जैसे यूपी दिवस के अवसर पर एसआरजी के कार्यक्रम में जिलाधिकारी महोदया को एक छोटी सी बिटिया प्रिया में अपना प्रतिरूप दिखा तो उन्होंने प्रिया को बड़े ही प्यार से अपने गले लगा लिया था जिलाधिकारी महोदया के लिए वह लम्हा हमेशा यादगार रहेगा।
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सकीना गुप्ता ने बताया कि ठीक वैसे ही कुछ दिनों पहले मेरी मुलाकात क्षेत्राधिकारी भोगनीपुर तनु उपाध्याय जी से हुई उन्हें देखकर मुझे 2009-10 में टीवी पर आने वाले धारावाहिक दिया और बाती की मुख्य अदाकारा संध्या राठी की याद आ गई। संध्या राठी एक अधिकारी के रूप में थी जो बहुत ही चतुर चालाक और न्याय की पक्षधर थी। पहली बार 2022 में प्रत्यक्ष रूप से तनु जी को देखा , देख कर बहुत खुशी महसूस हुई थी क्योंकि किसी कारणवश उनके आफिस आई थी तब मैनें उनको देखा था। उनका व्यवहार बहुत ही सरल स्वभाव का देख अच्छा लगा था। और ये मधुर व्यवहार उनका हर व्यक्ति के लिए था। महोदया जी उच्च व्यक्तित्व के साथ न्यायप्रिय भी हैं । आज मेरी उनसे एक शिष्टाचार भेंट हुई वह हमेशा ऐसे ही तरक्की करती रहें और अपनी कुशल कार्यशैली से जनता को न्याय दिलाती रहें। हम ईश्वर से यह प्रार्थना करते हैं। जो हम न कर सके कोई तो है वो सब करने के लिए।
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जिन खोजा तिन पाया, गहरे पानी पैठ। मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।। अर्थात् जो प्रयत्न करते हैं वह कुछ ना कुछ वैसे ही पा ही लेते हैं जैसे कोई मेहनत करने वाला गोताखोर गहरे पानी में जाता है और कुछ लेकर आता है लेकिन कुछ बेचारे लोग ऐसे भी होते हैं जो डूबने के भय से किनारे पर ही बैठे रह जाते हैं और कुछ नहीं पाते।
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