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गंगाजल बना ‘काल’? मोहन भागवत को जल देने वाले छात्र का निष्कासन

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में एक शोध छात्र सौरभ सौजन्य पर हुई कठोर कार्यवाही चर्चा का विषय बन गई है।

Story Highlights
  • 'गंगाजल' का 'दंश'? राजनीतिक दबाव और भेदभाव का आरोप

कानपुर: चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में एक शोध छात्र सौरभ सौजन्य पर हुई कठोर कार्यवाही चर्चा का विषय बन गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कथित तौर पर पिछले साल दिसंबर में गृहमंत्री अमित शाह के संसद में दिए गए बयान के विरोध में ‘जय भीम’ का नारा लगाने के ‘अपराध’ में सौरभ को चार महीने बाद अचानक छात्रावास से निष्कासित कर दिया है। इतना ही नहीं, उस पर 20 हजार रुपये का भारी जुर्माना भी ठोका गया है और उसे चरित्र परिवीक्षा में रखने का फरमान भी सुनाया गया है।

छात्र सौरभ ने इस एकतरफा कार्रवाई को विश्वविद्यालय प्रशासन की भेदभावपूर्ण मानसिकता और राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह दंडात्मक कार्रवाई, जिसमें उनका छात्रावास से निष्कासन शामिल है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत को जल अर्पित करने के तुरंत बाद ही क्यों की गई? क्या एक छात्र द्वारा भागवत को जल अर्पित करना विश्वविद्यालय प्रशासन को नागवार गुजरा?

सौरभ ने स्पष्ट रूप से कहा कि असहमत होना और शांतिपूर्ण विरोध जताना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। ‘जय भीम’ का नारा लगाने की घटना के चार महीने बाद, बिना किसी पूर्व सूचना के, एक साथ छात्रावास से निकालना, भारी जुर्माना लगाना और चरित्र परिवीक्षा में रखना सरासर अन्याय और छात्रों को दबाने की साजिश है। उन्होंने ऐलान किया कि वह इस कार्रवाई के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और न्याय के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। इस घटना ने सीएसए में छात्रों के बीच गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।

AMAN YATRA
Author: AMAN YATRA

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