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बरौर रामलीला में गंगा लीला व पुष्प वाटिका मंचन देख दर्शक हुए भावविभोर,जयकारों से गूंज उठा पांडाल

बरौर कस्बा स्थित श्रीराम बाजार धनुष यज्ञ रामलीला समिति के तत्वाधान में आयोजित रामलीला में गंगा लीला व पुष्प-वाटिका प्रसंग का मंचन किया गया।जहां गंगा लीला के दौरान एकत्र गंगा जी के पंडों के वार्तालाप ने लोगों को गुदगुदाया तो वही पुष्प वाटिका के मार्मिक वर्णन से लोग मंत्रमुग्ध हो गए

पुखरायां।बरौर कस्बा स्थित श्रीराम बाजार धनुष यज्ञ रामलीला समिति के तत्वाधान में आयोजित रामलीला में गंगा लीला व पुष्प-वाटिका प्रसंग का मंचन किया गया।जहां गंगा लीला के दौरान एकत्र गंगा जी के पंडों के वार्तालाप ने लोगों को गुदगुदाया तो वही पुष्प वाटिका के मार्मिक वर्णन से लोग मंत्रमुग्ध हो गए।

श्रीराम बाजार धनुष यज्ञ लीला समिति बरौर की ओर से कस्बे में चल रही रामलीला के दौरान लीला का आरंभ विश्वामित्र दोनों राजकुमारों राम और लक्ष्मण के साथ नगर भ्रमण करते हुए गंगा नदी के किनारे पंहुचे।जहां गंगा नदी में स्नान करने पर घाट पर देखते पन्डों के बीच हुए वार्तालाप ने लोगों को जमकर गुदगुदाया।गंगा नदी में स्नान कर गांग पुत्रों को दक्षिणा देने के पश्चात राम लक्ष्मण गुरु विश्वामित्र के साथ पुनः मिथिला के नर नारियों का दर्शन करते हैं ।

 

पुष्प वाटिका प्रसंग में दिखाया गया कि देव पूजन को गुरु विश्वामित्र श्रीराम को पुष्प लाने की आज्ञा देते हैं।भगवान श्रीराम, अनुज लक्ष्मण के साथ पुष्प लाने हेतु वैदेही वाटिका पहुंचते हैं। जहां जनक नंदनी जानकी व दशरथ नंदन श्रीराम की आंखें चार हो जाती हैं। श्रीराम पुष्प के लिए वाटिका के पास पहुंचते हैं। वहां उन्हें देखते ही वाटिका की रखवाली को मुख्य द्वार पर तैनात माली उन्हें अंदर प्रवेश करने से रोक देते हैं। भगवान श्रीराम बंधु माली हो हमके चाहीं कछु तुलसी दल और फूल. गाते हुए फूलवाड़ी में प्रवेश की अनुमति मांगते हैं, त्रेतायुग का यह अलौकिक दृश्य पंडाल में बने वैदेही वाटिका में साकार हो रहा था। प्रसंग के दौरान लोग भगवान को रिझाने के लिए अपनी सुमधुर व प्रेममयी बातों से तरह-तरह के हास-परिहास कर रहे थे। उनकी द्विअर्थी विनोद पूर्ण बातों के उलझन में मिथिला की परंपरागत मेहमानी स्वागत के बीच भगवान श्रीराम उलझकर व अटककर रह जाते थे। आखिरकार दोनों पक्षों की ओर से उलझन परवान चढ़ने पर मालियों ने यह महसूस कर लिया कि श्रीराम खुद के हाथों ही पुष्प उतारने पर अड़े हैं तो बीच का रास्ता निकालते हुए उन्हें वाटिका में प्रवेश की अनुमति तो दी, लेकिन उनके द्वारा जानकी की जयकारा लगाने के शर्त पर। जिसे सुन पहले तो श्रीराम व लक्ष्मण दोनों बिदके, परंतु दूसरा कोई चार नहीं देख जनक नंदनी की जयकारा लगाने की मालियों की शर्त को उन्हें पूरा करना पड़ता है। जिसके बाद भी मालीगण उनसे विनोद करने से नहीं चूकते हैं और मिथिला को अयोध्या के श्रीराम से श्रेष्ठ बताने के लिए तंज कसते हुए

अब तो राम ने सीता की जय-जयकार बोल दिया, हमारे सूखे हिया में अमृत का मिठास घोल दिया.

गाते हुए खूब चुटकी लेते हैं। मालियों की अनुमति पर दोनों भाई वाटिका के अंदर प्रवेश करते हैं और फुलवारी के सौंदर्य को निहारते हुए पुष्प तोड़ने रम जाते हैं।लीला देख दर्शक भावविभोर हो जाते हैं।इस मौके पर ग्राम प्रधान सुरजीत सिंह, योगेंद्र नाथ पांडेय, एडवोकेट विमल कुमार द्विवेदी,रामजी चतुर्वेदी,रवींद्र शुक्ला, रूपनारायण सिंह यादव, संतोष तिवारी, हरिओम अवस्थी, सोनेलाल उपाध्याय,अमन कश्यप,सोनू शुक्ला, कामतानाथ अवस्थी, कन्हैयालाल यादव,मयंक त्रिवेदी,शुभ गुप्ता, गोयल शर्मा, गौरव पंडित, गोलू द्विवेदी आदि लोग मौजूद रहे।

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Author: anas quraishi

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