कानपुर देहातउत्तरप्रदेशफ्रेश न्यूज
डीएपी किल्लत : किसान की आय दोगुनी नहीं कम होती देखी जा रही है
सरकारी खाद गोदाम में खाद ना मिलने से किसान परेशान है वहीं प्राइवेट दुकानदार महंगे दामों में किसानों को ब्लैक में खाद बेच रहे हैं जिससे किसानों को भारी नुकसान पड़ रहा है।किसानों की समस्या की ओर जिला प्रशासन भी मौन है।

रसूलाबाद : सरकारी खाद गोदाम में खाद ना मिलने से किसान परेशान है वहीं प्राइवेट दुकानदार महंगे दामों में किसानों को ब्लैक में खाद बेच रहे हैं जिससे किसानों को भारी नुकसान पड़ रहा है।किसानों की समस्या की ओर जिला प्रशासन भी मौन है।
जनपद कानपुर देहात में खाद किल्लत खत्म नही हो रही है जिससे किसानों की फसलों की बोनी लेट हो रही है। रसूलाबाद क्षेत्र के खाद समितियों में डीएपी खाद नही मिल रही है जिसका फायदा प्राइवेट दुकानदार उठा रहे है और किसानों को डीएपी 1600 से 1700 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से प्राइवेट दुकानदार बेच रहे है। ऐसे में किसान मजबूरन अपनी फसल की बोनी समय से करने के लिए महंगे दामो में खाद खरीद रहा है लेकिन छोटा किसान यहां सरकार की बोरियों की तरफ निगाह डाले बैठा है कि कब समितियों में खाद पहुंचे और कब वो फसल की बोनी कर पाए। कालाबाजारी व कृषि विभाग की हीलाहवाली के बीच किसान पिस्ता हुआ देखा जा रहा है। जो खाद सरकारी समितियों में 1350 रुपये प्रति बोरी मिल रही है वही खाद प्राइवेट दुकानों पर ब्लैक में 1600 से 1700 रुपये के बीच बिक रही है इसमें कृषि विभाग की भूमिका संदिग्ध भी हो सकती है।
आखिर किसानों की इतनी बड़ी समस्या को कृषि विभाग क्यो नजर अंदाज किये बैठा है। कृषि विभाग न समितियों में खाद भिजवा पा रहा है और न ही प्राइवेट दुकानों पर छापा डाल रहा है। ऐसे में तो यही प्रतीत होता कि कृषि विभाग की भूमिका संदिग्ध है। सरकार के जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधियों को भी इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए जिससे किसान की कमर तुड़ती हुई बच सके। सरकार भले ही किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही हो लेकिन जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ और है किसानों को खाद समय से मुहैया नहीं हो पा रहे हैं इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसानों की आय दोगुनी हो रही है या आए कम हो रही है। सोमवार तक समितियों में खाद नहीं पहुंच पाई है।
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