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निजी स्कूलों के आगे विभाग हुआ फेल, आरटीई में आधे बच्चों को ही मिला प्रवेश

अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत तमाम सख्ती और शुल्क भरपाई के बाद भी प्राइवेट स्कूलों की मनमानी जारी है। वर्तमान सत्र में 165544 बच्चों को सीट आवंटित की गई है और इसमें से अभी तक मात्र 72044 सीटों पर ही प्रवेश हुआ है।

Story Highlights
  • स्कूलों पर कड़ाई के निर्देश, डीजीएसई ने सभी जिलाधिकारियों को भेजा पत्र 
  • आवंटित 1.65 लाख के सापेक्ष 72 हजार बच्चों को मिला प्रवेश

लखनऊ/कानपुर देहात। अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत तमाम सख्ती और शुल्क भरपाई के बाद भी प्राइवेट स्कूलों की मनमानी जारी है। वर्तमान सत्र में 165544 बच्चों को सीट आवंटित की गई है और इसमें से अभी तक मात्र 72044 सीटों पर ही प्रवेश हुआ है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने सभी डीएम को पत्र भेजकर आरटीई में प्रवेश न लेने वाले स्कूलों पर कड़ाई करने को कहा है। आरटीई के तहत निजी स्कूल में कमजोर आय वर्ग के बच्चों का प्री प्राइमरी व कक्षा एक में प्रवेश दिलाया जाता है।

इस बार बेसिक शिक्षा विभाग ने चार चरणों में आवेदन लेकर लॉटरी निकाला। इस बार कुल 357270 आवेदकों में से 165544 बच्चों को स्कूल आवंटित हुए, इसके सापेक्ष आधे से भी कम बच्चों को प्रवेश दिया गया है। इस पर निदेशालय ने नाराजगी व्यक्त की है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने कहा है कि चयनित बच्चों के अभिभावकों से अनावश्यक अभिलेख की मांग की जा रही है। चयनित बच्चों की पात्रता को जांच के लिए अभिभावकों के घर का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। अभिभावकों से अतिरिक्त धनराशि की मांग की जा रही है। विभिन्न कारण बताकर बच्चों को प्रवेश से वंचित किया जा रहा है।

यह गंभीर व चिंताजनक है। उन्होंने सभी डीएम व अध्यक्ष जिला शिक्षा परियोजना समिति से ऐसे विद्यालयों को नोटिस जारी कर आरटीई एक्ट के तहत कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा है। हालांकि शैक्षिक सत्र 2023-24 के सापेक्ष आरटीई के तहत आए आवेदन में 25 फीसदी की वृद्धि हुई और सीट आवंटन में भी 23 फीसदी की वृद्धि हुई है।

AMAN YATRA
Author: AMAN YATRA

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