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निराश्रित गौवंश संरक्षण योजना: जिलाधिकारी की सक्रियता से नई उम्मीदें

जिलाधिकारी आलोक सिंह की अध्यक्षता में मॉ मुक्तेश्वरी देवी सभागार, कलेक्ट्रेट में निराश्रित गौवंश संरक्षण, शीत ऋतु से बचाव, सहभागिता योजना, नोडल अधिकारियों द्वारा निरीक्षण एवं गौ आश्रय स्थलों के संचालन के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

Story Highlights
  • गौवंश संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन का प्रयास
  • सर्दी से गौवंशों की रक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई: सभी गौशालाओं में तिरपाल और काऊकोट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

कानपुर देहात: जिलाधिकारी आलोक सिंह की अध्यक्षता में मॉ मुक्तेश्वरी देवी सभागार, कलेक्ट्रेट में निराश्रित गौवंश संरक्षण, शीत ऋतु से बचाव, सहभागिता योजना, नोडल अधिकारियों द्वारा निरीक्षण एवं गौ आश्रय स्थलों के संचालन के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि निराश्रित गौवंशों को सघन अभियान चलाकर गौशालाओं में संरक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि चिन्हित हॉटस्पॉट, हाईवे और प्रमुख सड़कों पर नियमित निगरानी की जाए और गौवंशों को गौशालाओं में सुरक्षित पहुंचाया जाए। जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि संरक्षित गौवंशों की रिपोर्ट समय-समय पर प्रस्तुत की जाए।

गौशालाओं में शीत ऋतु से बचाव के प्रबंध के निर्देश
जिलाधिकारी ने गौशालाओं में ठंड से बचाव हेतु तिरपाल और काऊकोट की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। बीमार गौवंशों के लिए अलग स्थान पर इलाज की उचित व्यवस्था करने और उनके भरण-पोषण की मांग समय पर भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़कों और खेतों में घूम रहे निराश्रित गौवंशों को गौशालाओं में संरक्षित करने के लिए सायंकाल विशेष अभियान चलाने का आदेश दिया।

गौशालाओं का प्रबंधन और निर्माण कार्य की समीक्षा
जिलाधिकारी ने निर्माणाधीन गौशालाओं के कार्य को शीघ्र पूर्ण करने और वहां भूसा, चूनी, चोकर, और पशु आहार की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। नोडल अधिकारियों द्वारा निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों को तत्काल ठीक कराने के लिए मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया।

सहभागिता योजना को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार का आह्वान
जिलाधिकारी ने सहभागिता योजना के अंतर्गत गौवंश सुपुर्दगी प्रक्रिया पर जोर देते हुए कहा कि लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से निर्धारित धनराशि उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाए। योजना के तहत लाभार्थियों को अधिकतम चार गौवंश सुपुर्द किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि गौवंशों की सुपुर्दगी से उनके भरण-पोषण की बेहतर व्यवस्था होगी, स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता में सुधार होगा, और गौशालाओं में संरक्षण का प्रबंधन प्रभावी रूप से किया जा सकेगा।

उपस्थित अधिकारी:
मुख्य विकास अधिकारी लक्ष्मी एन., जिला परियोजना अधिकारी वीरेंद्र सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी सुबोध कुमार, समस्त खंड विकास अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी और नोडल अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे।

संरक्षण और सहभागिता पर विशेष जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि इच्छुक लाभार्थियों द्वारा चिन्हित गौवंशों को तुरंत सुपुर्द कर दिया जाए ताकि संरक्षण और प्रबंधन के सकारात्मक परिणाम प्राप्त हों। यह बैठक गौवंश संरक्षण और सहभागिता योजना को प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

AMAN YATRA
Author: AMAN YATRA

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