प्रकाश पर्व पर मोदी जी द्वारा कृषि कानूनों को वापस लेना उनकी सहृदयता : विद्या सागर त्रिपाठी
भाजपा के वरिष्ठ नेता विद्यासागर त्रिपाठी ने कहा है कि देश के प्रधानमंत्री मोदी जी का कृषि कानूनों को लेकर उठाया गया कदम न केवल सराहनीय है वरन् उनकी बड़ी सोच का परिचायक है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र भाई मोदी प्रधानमंत्री भारत सरकार ने आज गुरू नानक देव जी की जन्म जयंती प्रकाशपर्व के सुअवसर पर यह कहते हुये कि दिये के प्रकाश पुंज जैसे श्वेत कृषि कानूनों के सत्य को हम कुछ किसान नेताओं को समझाने में असफल रहे,कृषि वैज्ञानिकों कृषि विशेषज्ञयों की मेहनत सफल नहीं कर सके, इसलिए आज गुरु नानक देव जी की जयंती प्रकाश पर्व के सुअवसर पर कृषि सुधार हेतु बने तीनों नये कानून देश के लोगों से क्षमा मांगते हुये वापस लेने की घोषणा करता हूँ।

अकबरपुर,सुशील त्रिवेदी । भाजपा के वरिष्ठ नेता विद्यासागर त्रिपाठी ने कहा है कि देश के प्रधानमंत्री मोदी जी का कृषि कानूनों को लेकर उठाया गया कदम न केवल सराहनीय है वरन् उनकी बड़ी सोच का परिचायक है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र भाई मोदी प्रधानमंत्री भारत सरकार ने आज गुरू नानक देव जी की जन्म जयंती प्रकाशपर्व के सुअवसर पर यह कहते हुये कि दिये के प्रकाश पुंज जैसे श्वेत कृषि कानूनों के सत्य को हम कुछ किसान नेताओं को समझाने में असफल रहे,कृषि वैज्ञानिकों कृषि विशेषज्ञयों की मेहनत सफल नहीं कर सके, इसलिए आज गुरु नानक देव जी की जयंती प्रकाश पर्व के सुअवसर पर कृषि सुधार हेतु बने तीनों नये कानून देश के लोगों से क्षमा मांगते हुये वापस लेने की घोषणा करता हूँ।
जिस तरह किसी संस्कारित सभ्रांत घर परिवार का मुखिया अपने घर परिवार की ना-समझ बचकानी जिद के आगे घर परिवार की एकता और अखण्डता को बनाये रखने के लिए सालीनता के साथ झुक कर परिवार की बात स्वीकार कर लेता हैै, ठीक उसी तरह देश के किसान रूपी घर परिवार की ना-समझ भावनाओं का आदर करते हुये देश के मुखिया प्रधानमंत्री मा.मोदी जी ने किसानों के लिए बने तीनों नये कृषि कानूनों की वापसी की बात मानकर उन्होंने अपने विशाल हृदय का परिचय देते हुये किसानों का आदर किया है,जो अभिनन्दनीय हैै, बंदनीय हैै।
वर्तमान भारत के राजनीतिक परिदृष्य में सत्ता के लिए आतुर विपक्षी नेता गण अभी भी तीनों नये बने कृषि कानूनों की प्रधानमंत्री जी द्वारा वापसी करने की घोषणा के बाद भी राजनीतिक रोटियां सेंकने से नहीं चूकेंगे,वो कानूनों की वापसी को किसी की हार,किसी की जीत, बताकर स्वयं श्रेय लेने की होड़ में आगे आकर खड़े होंगे,भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री जी पर नये नये आरोप प्रत्यारोप निर्धारित करने का प्रयास करके जनता को गुमराह करने का भरशक्त प्रयास करेंगे।
स्वतंत्र भारत के पूर्व इतिहास में किसानों व किसान संगठनों ने कई आन्दोलन पहले भी किये हैं, किसी आन्दोलन में पूर्व वर्ती सरकारों ने लाठियां चलवाई, किसी आन्दोलन में गोलियां चलवायीं, जिसमें कई किसान मारे भी गये,तथा कई किसान घायल भी होते रहे, लेकिन वर्तमान तीनों कृषि कानूनों के विरोध में लगभग एक वर्ष से दिल्ली बार्डर सहित देश के विभिन्न भागों में चल रहे आन्दोलन में तमाम झंझावातों के बावजूद सरकार ने न कहीं लाठियां चलवाईं, न कहीं गोलियां चलवायी, बल्कि अन्त में किसानों की भावनाओं का आदर करते हुये उनकी चिर-प्रतीक्षित माँगों के अनुरूप तीनों नये बने कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐतिहासिक निर्णय लिया, जो स्वतंत्र भारत की वर्तमान मोदी जी की भाजपा सरकार का बेहद साहसिक और राष्ट्रवादी नीतियों का परिचयात्मक निर्णय हैै। आइये हम सब राष्ट्रवादी बनकर प्रधानमंत्री मा.मोदी जी के इस निर्णय का स्वागत करें।
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