बच्चे स्कूल नहीं आएंगे तो निपुण लक्ष्य गुरु जी कैसे पाएंगे
बेसिक शिक्षा विभाग के सरकारी विद्यालयों में पंजीकृत बच्चों की उपस्थिति नहीं बढ़ रही है। हैरत वाली बात यह है कि यूनीफॉर्म का पैसा लेने वाले बच्चे भी स्कूल की चौखट तक नहीं पहुंच रहे हैं। करीब 80 हजार बच्चों के नियमित विद्यालय नहीं आने से निपुण भारत अभियान की सफलता पर सवालिया निशान लग गया है।

अमन यात्रा, कानपुर देहात। बेसिक शिक्षा विभाग के सरकारी विद्यालयों में पंजीकृत बच्चों की उपस्थिति नहीं बढ़ रही है। हैरत वाली बात यह है कि यूनीफॉर्म का पैसा लेने वाले बच्चे भी स्कूल की चौखट तक नहीं पहुंच रहे हैं। करीब 80 हजार बच्चों के नियमित विद्यालय नहीं आने से निपुण भारत अभियान की सफलता पर सवालिया निशान लग गया है।
अब विभाग उन बच्चों के बारे में जानकारी हासिल करने में जुटा है जो रजिस्टर पर तो हैं मगर विद्यालय नहीं आते। जिले में 1925 परिषदीय विद्यालयों में करीब 1.44 लाख बच्चे पंजीकृत हैं लेकिन विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति अफसोसजनक है। तीन महीने पहले प्रदेश स्तर पर हुई समीक्षा में जिले के विद्यालयों में औसत उपस्थिति मात्र 60 फीसदी पाई गई। जिला पूरे प्रदेश में काफी नीचे पायदान पर रहा। अब तक कई शिक्षकों का वेतन बीएसए द्वारा रोका जा चुका है लेकिन हालात सुधर नहीं रहे हैं।
विद्यालयों में अधिकतम उपस्थिति अभी भी 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो रही है। सरकार बच्चों को गणित व भाषा में पारंगत करने के लिए निपुण भारत अभियान चला रही है। उनके मानसिक व बौद्धिक विकास को लेकर कई कवायदें हो रही हैं, शिक्षक भी की जान से लगे हुए हैं, अधिकारी भी ताबड़तोड़ तोड़ निरीक्षण कर रहे हैं मगर जब बच्चें नियमित विद्यालय ही नहीं आ रहे हैं तो स्वाभाविक सी बात है कि अभियान कैसे सफल होगा।
विभाग के अधिकारी स्वीकार करते हैं कि बिना उपस्थिति बढ़ाए अभियान पूरा नहीं हो सकता। अब समस्या यहां आती है कि शिक्षकों के लाख प्रयास के बावजूद शत प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं अब आखिर इसके लिए शिक्षकों को दोष दिया जाना तो उचित नहीं है।
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