बच्चों के लिए आधार कार्ड बना जी का जंजाल, स्कूलों में नहीं हो पा रहा दाखिला
सरकारी स्कूलों में बच्चों के दाखिले के लिए भले ही आधार कार्ड अनिवार्य न हो लेकिन स्कूल में मिलने वाली कुछ सरकारी योजनाओं के लाभ लेने के लिए आधार कार्ड की आवश्यकता होती है।

राजेश कटियार, कानपुर देहात। सरकारी स्कूलों में बच्चों के दाखिले के लिए भले ही आधार कार्ड अनिवार्य न हो लेकिन स्कूल में मिलने वाली कुछ सरकारी योजनाओं के लाभ लेने के लिए आधार कार्ड की आवश्यकता होती है। ऐसे में शिक्षक मजबूरीवस बिना आधार नंबर वाले बच्चों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं बल्कि उनका एक सप्ताह के अंदर आधार कार्ड बनवाने का अभिभावकों से अनुरोध कर रहे हैं। ऐसे में बिना आधार वाले बच्चों के दाखिले का संकट और गहरा गया है।
कई स्कूलों ने बिना आधार वाले बच्चों का दाखिले देने से मना कर दिया है। कुछ स्कूल वाले अभिभावकों को 15 दिन में आधार बनवाकर देने की शर्त पर बच्चों को स्कूल में सिर्फ बैठने की इजाजत दे रहे हैं लेकिन दाखिला तभी देंगे जब आधार बनाकर देंगे। गैर जिलों व प्रदेशों से आए मजदूरों के बच्चों के पास निवास और जन्म प्रमाणपत्र नहीं होने से आधार बनने में अड़चनें आ रही है। नए सत्र के 4 दिन में स्कूलों में बिना आधार वाले करीब एक सैकड़ा बच्चे दाखिले के लिये पहुंचे हैं लेकिन इनके दाखिले अभी नहीं हुए हैं। बीते वर्ष करीब 11 हजार से अधिक बच्चों के आधार नहीं बने होने से अपार आईडी, यू डायस और डीबीटी के तहत यूनीफार्म का पैसा इन्हें मिल सका था।
बिना आधार अपार आईडी और यू डायस में नहीं होगी एंट्री-
जनपद में 1925 परिषदीय स्कूल संचालित हो रहे हैं। एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हो गया है। विभागीय अधिकारी बच्चों के दाखिले बढ़ाने के लिये शिक्षकों से स्कूल चलो अभियान और प्रभात फेरी निकालने के निर्देश जारी कर चुके हैं। अभिभावक बच्चों के दाखिले दिलाने के लिये स्कूल आ रहे हैं लेकिन कुछ बच्चों के पास आधार नहीं होने से शिक्षक इनका नाम लिखने से मना कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि यदि इन बच्चों को दाखिले दे दिया तो अपार आईडी और यू डायस पर एंट्री कैसे करेंगे ? इससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बिना आधार के छात्र-छात्राओं को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। फरवरी माह में अपार आईडी नहीं बनने पर बीएसए ने शिक्षकों को कड़ी फटकार लगाई थी। इससे शिक्षकों में भारी आक्रोश रहा। यही वजह है कि शिक्षक बिना आधार वाले बच्चों के दाखिले नहीं ले रहे हैं।
पार्षद, ग्राम प्रधान, विधायक भी नहीं लिखकर देते पत्र-
मजूदरों का कोई स्थायी निवास नहीं होने की वजह से पार्षद, ग्राम प्रधान, विधायक भी निवास प्रमाण पत्र के लिये लिखकर नहीं देते हैं। इससे इनके आगे निवास व जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में बड़ी अड़चन आ रही है। आधार नहीं बन पा रहा है जिस कारण इनके बच्चों के दाखिले नहीं हो पा रहे हैं।
बेसिक शिक्षा अधिकारी अजय कुमार मिश्रा का कहना है कि प्रत्येक बीआरसी केंद्र पर परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले या नामांकन करने वाले बच्चों के आधार बनाने की व्यवस्था है। दाखिला लेने वाले जिन बच्चों के आधार नहीं बने हैं। स्कूलों के प्रधानाध्यापक अभिभावकों की मदद से इन बच्चों के आधार बनवा सकते हैं।
इसके पहले आधार बनाना और संशोधन आसान था। इसके पहले अभिभावक से शपथ पत्र बनवाकर प्रधानाध्यापक की संस्तुति पर आधार बन जाता था। अब जन्म प्रमाण पत्र के बिना आधार नहीं बन पा रहे हैं। इसे सरल करना चाहिए साथ ही प्रधानाध्यापक द्वारा प्रमाणित पत्र से भी आधार कार्ड बनाए जाने चाहिए।
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