बेसिक शिक्षा का हाल ए बेहाल : न जिले के अंदर और न पारस्परिक अंतर्जनपदीय तबादला हो रहा
परिषदीय शिक्षकों का न तो जिले के अंदर ओपन तबादला हो सका और न ही अंतर्जनपदीय पारस्परिक तबादले की ही कार्यवाही पूरी हो सकी। 27 जुलाई 2022 को जिले के अंदर स्थानांतरण और समायोजन की नीति जारी हुई थी लेकिन 2022-2023 और 2023-24 सत्र बीतने के बाद भी कुछ नहीं हो सका

- पारस्परिक तबादले के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट करा रहा विभाग
- सत्र बीतने के बाद स्थानांतरण को लेकर शिक्षक भी संशकित
- जिले के अंदर सालों से नहीं हुए तबादले, इंतजार में हजारों शिक्षक
- पिछले साल आदेश आने के बावजूद नहीं किया सका ट्रांसफर
लखनऊ/कानपुर देहात। परिषदीय शिक्षकों का न तो जिले के अंदर ओपन तबादला हो सका और न ही अंतर्जनपदीय पारस्परिक तबादले की ही कार्यवाही पूरी हो सकी। 27 जुलाई 2022 को जिले के अंदर स्थानांतरण और समायोजन की नीति जारी हुई थी लेकिन 2022-2023 और 2023-24 सत्र बीतने के बाद भी कुछ नहीं हो सका। शिक्षकों का कहना है कि जिले के अंदर परिषदीय शिक्षकों के खुले स्थानांतरण 2017 के बाद से नहीं हुए हैं जबकि इस दौरान जिले के अंदर पारस्परिक एवं अंतर्जनपदीय स्थानांतरण तीन बार हो चुके हैं चूंकि शिक्षक का पद जिला कैडर का है इसलिए जिले के अंदर स्थानांतरण में पहले से सेवारत वरिष्ठ शिक्षकों को वरीयता दी जानी चाहिए थी। हालांकि 2017 से अब तक तीन बार हुए अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के चलते दूसरे जिलों से आए शिक्षक शिक्षिकाओं को जिला मुख्यालय के अपेक्षाकृत करीब तैनाती नियमावली 2010 के विपरीत विद्यालय आवंटित कर दिए गए हैं जबकि उसी जनपद में पांच साल की सेवा पूरी कर चुके शिक्षक शिक्षिकाओं को खुले स्थानांतरण से वंचित रखा गया है।
इसके चलते सैकड़ों वरिष्ठ शिक्षक-शिक्षिकाएं जिला मुख्यालय से 30 से 40 किमी दूर के स्कूल में सेवा देने के लिए विवश हैं। वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट से शिक्षकों के पक्ष में निर्णय होने के बावजूद पारस्परिक तबादला भी नहीं हो सका है। बेसिक शिक्षा परिषद के उपसचिव राजेन्द्र सिंह की ओर से 20 अप्रैल को सुल्तानपुर के शिक्षक निर्भय सिंह को भेजे पत्र में लिखा गया है कि ट्रांसफर के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट किया जा रहा है। ऐसे में शिक्षकों में यह भी आशंका है कि सत्र बीतने के कारण तबादला होगा भी या नहीं क्योंकि तबादला नीति पिछले सत्र के लिए ही थी।
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