ब्याज दर पर घिर गई सरकार: सीतारमण बोलीं- गलती से पास हुआ आदेश, राहुल-प्रियंका ने पूछा- ‘लूट या चूक’
भारत सरकार की लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरें उन दरों पर बनी रहेंगी, जो 2020-2021 की अंतिम तिमाही में मौजूद थीं.

- सरकार ने यह आदेश ऐसे समय वापस लिया है. जब पश्चिम बंगाल और असम में विधानसभा चुनाव के लिए दूसरे दौर की वोटिंग हो रही है.
सीतारमण ने ट्वीट करके कहा, ‘’भारत सरकार की लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरें उन दरों पर बनी रहेंगी, जो 2020-2021 की अंतिम तिमाही में मौजूद थीं. ओवरसाइट की वजह से जारी आदेश वापस ले लिए जाएंगे.’’ इससे पहले एक फैसले में वित्त मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही के लिए लघु बचत दर में 3.5 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की थी. जनवरी-मार्च के दौरान छोटी बचत दर सालाना 4 प्रतिशत थी.
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘’पेट्रोल-डीज़ल पर तो पहले से ही लूट थी, चुनाव ख़त्म होते ही मध्यवर्ग की बचत पर फिर से ब्याज कम करके लूट की जाएगी. जुमलों की झूठ की, ये सरकार जनता से लूट की!’’
प्रियंका ने क्या कहा?
प्रियंका गांधी ने लिखा, ‘’सरकार ने आमजनों की छोटी बचत वाली स्कीमों की ब्याज दरों में कटौती कर दी थी. आज सुबह जब सरकारी जागी तो उसको पता चला कि अरे ये तो चुनाव का समय है. सुबह उठते ही सारा दोष ओवरसाइट पर मढ़ दिया.’’ दरअसल सरकार ने यह आदेश ऐसे समय वापस लिया है. जब पश्चिम बंगाल और असम में विधानसभा चुनाव के लिए दूसरे दौर की वोटिंग हो रही है.
जो आदेश सरकार ने वापस ले लिए-
आर्थिक मामलों के विभाग ने कहा था कि 1 साल की समय जमा दरों को 5.5 प्रतिशत से 4.4 प्रतिशत कर दिया गया है और 2-वर्ष, 3-वर्ष, 5-वर्ष की जमा दर में तिमाही आधार पर क्रमश: 5.0 प्रतिशत, 5.1 प्रतिशत और 5.8 प्रतिशत की कटौती की गई है. 5 साल की आवर्ती जमा को पिछले 5.8 प्रतिशत से 5.3 प्रतिशत तक घटा दिया गया था.
सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ), सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई ), राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र पर ब्याज दरों में वार्षिक आधार पर क्रमश: 6.4 प्रतिशत, 6.9 प्रतिशत और 5.9 प्रतिशत की कटौती की गई थी. किसान विकास पत्र पर ब्याज दर को घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया गया था.
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