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होलिका दहन नहीं होगा भद्रकाल के साए में, जानें होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
होली के पर्व को लेकर तैयारियां आरंभ हो गई हैं. होलिका दहन के बाद रंगों की होली खेली जाती है. इस वर्ष होलिका दहन भद्रकाल में नहीं होगा.

भद्रा का अर्थ
किसी भी शुभ कार्य को करने से पूर्व भद्रा योग का ध्यान किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि शुभ कार्य भद्रा योग में नहीं किए जाने चाहिए. पुरणों में भद्रा को सूर्य की पुत्री और शनिदेव की बहन बताया गया है. भद्रा का स्वभाव भी शनिदेव की तरह बताया गया है. पंचांग की गणना में भद्राकाल की भूमिका विशेष मानी गई है. इसे विष्टि करण में स्थान प्राप्त है. कुछ कार्यों के लिए भद्राकाल को शुभ भी माना गया है.
किसी भी शुभ कार्य को करने से पूर्व भद्रा योग का ध्यान किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि शुभ कार्य भद्रा योग में नहीं किए जाने चाहिए. पुरणों में भद्रा को सूर्य की पुत्री और शनिदेव की बहन बताया गया है. भद्रा का स्वभाव भी शनिदेव की तरह बताया गया है. पंचांग की गणना में भद्राकाल की भूमिका विशेष मानी गई है. इसे विष्टि करण में स्थान प्राप्त है. कुछ कार्यों के लिए भद्राकाल को शुभ भी माना गया है.
होली दहन के समय नहीं होगा भद्रा काल
इस वर्ष पंचांग के अनुसार 28 मार्च को भद्रा काल दोपहर 1 बजकर 54 मिनट तक ही रहेगा.
होलिका दहन कब है?
पंचांग के अनुसार होलिका दहन 28 मार्च रविवार को किया गया जाएगा. इस दिन पूर्णिमा की तिथि है. होलिका दहन का मुहूर्त शाम 6 बजकर 37 मिनट से रात्रि 8 बजकर 56 मिनट तक रहेगा. पंचांग के अनुसार 29 मार्च सोमवार को फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि में रंगों की खेली खेली जाएगी.
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