विकसित एवं विकासशील देशों हेतु सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करना अतिआवश्यक
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में दिनांक 21 दिसम्बर 2022 को सतत विकास लक्ष्यों की अवधारणा को अभिज्ञानित करने, उनका स्थानीयकरण करने एवं जन मानस में जागरूकता का प्रचार-प्रसार करने हेतु एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम / कार्यशाला का कलेक्ट्रेट स्थित 'माँ मुक्तेश्वरी देवी सभागार कक्ष में आयोजन किया गया।

- सभी की सक्रीय सहभागिता से प्रप्त करेंगे सतत विकास के 17 लक्ष्य- जिलाधिकारी
अमन यात्रा, कानपुर देहात। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में दिनांक 21 दिसम्बर 2022 को सतत विकास लक्ष्यों की अवधारणा को अभिज्ञानित करने, उनका स्थानीयकरण करने एवं जन मानस में जागरूकता का प्रचार-प्रसार करने हेतु एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम / कार्यशाला का कलेक्ट्रेट स्थित ‘माँ मुक्तेश्वरी देवी सभागार कक्ष में आयोजन किया गया। उक्त कार्यशाला में राज्य स्तर से नामित यूनिसेफ के प्रतिनिधि श्री कुशल कुमार मौर्या एवं नियोजन विभाग के प्रतिनिधि श्री प्रदीप कुमार द्विवेदी सहित नेहा जैन- जिलाधिकारी, सौम्या पाण्डेय- मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार द्विवेदी प्रभागीय वनाधिकारी अरुण कुमार सिंह मुख्य चिकित्साधिकारी शीश कुमार, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी एवं सभी विभागों के अधिकारीगण उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त उक्त कार्यशाला में जनपद के उपजिलाधिकारीगण, खण्ड विकास अधिकारीगण, सचिव-ग्राम पंचायत एवं समस्त ग्राम प्रधानों द्वारा उक्त कार्यशाला में जूम के माध्यम से अपनी सहभागिता सुनिश्चित की गयी ।
राज्य स्तर से यूनिसेफ के नामित प्रशिक्षक श्री कुशल कुमार मौर्या द्वारा अवगत कराया गया कि सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने का फैसला संयुक्त राष्ट्र महासभा की न्यूयार्क बैठक दिनांक 25.08.2015 में लिया गया, जिसमें 193 देशों ने भाग लिया। इसी बैठक में अगले 15 साल के लिए 17 सतत विकास लक्ष्य (एस०डी०जी०) तथा उनसे सम्बद्ध 169 लक्ष्य निर्धारित किये गये, जिनको 2016 से 2030 की अवधि में हासिल करने का निर्णय लिया गया है। सतत विकास लक्ष्य के वैश्विक लक्ष्यों में गरीबी खत्म करना, पर्यावरण की रक्षा, आर्थिक असमानता को कम करना और सभी के लिए शांति और न्याय सुनिश्चित करना शामिल है। यह लक्ष्य सभी 193 विकसित एवं विकासशील देशों को प्राप्त करने होंगे। यह सतत विकास लक्ष्य एकीकृत है और विकास के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय आयामों को संतुलित करते हैं। इन 17 लक्ष्यों में से कई लक्ष्य आपस में जुड़े हुए और “पीछे कोई नहीं छूटे” के सिद्धांत पर आधारित है। दुनिया को बेहतर बनाने के लिए एवं भावी पीढ़ी के बेहतर भविष्य हेतु इन लक्ष्यों की पूर्ति दृढ इच्छाशक्ति कठोर परिश्रम, अनुभव, बौद्धिक कौशल, सतत प्रयास एवं तकनीक के कुशल प्रयोग से ही सम्भव हैं श्री मौर्या द्वारा सज्ञान में लाया गया कि सतत विकास के मुख्य लक्ष्य SP पर केन्द्रीकृत हैं अर्थात प्रथम P. People (लोग) – अर्थात सब लोगों की भलाई, द्वितीय-P- Planet (गृह)- अर्थात हमारा पर्यावरण का स्थायी विकास एवं स्थायी रूप से उसकी देखभाल करना, तृतीय-P- Prosperity (समृद्धि)- अर्थात सामाजिक और आर्थिक समृद्धि चतुर्थ- P- Partnership. अर्थात साझेदारी तथा पचम- P. Peace (शाति)- अर्थात हम सबको इस गृह में शांति के साथ रहना है। नियोजन विभाग के प्रतिनिधि श्री प्रदीप कुमार द्विवेदी द्वारा अवगत कराया गया कि सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति को मापने एवं उसका सतत अनुश्रवण करने हेतु भारत सरकार के साख्यिकीय और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय संकेतक फ्रेमवर्क (NIF) में 17 लक्ष्यों को कवर करने के लिए 208 विषम संकेतक निर्धारित किये गये है। इसी प्रकार, भारत सरकार द्वारा राज्यों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्तर पर एस०डी०जी० की निगरानी के महत्व को ध्यान में रखते हुए 17 लक्ष्यों को कवर करने के लिए प्रवेश में राज्य संकेतक फ्रेमवर्क (SIF) में 101 विषम संकेतक एवं उ0प्र0 सरकार द्वारा जनपदों की निगरानी करने हेतु कुल 148 संकेतक (मासिक-47. त्रैमासिक 01 अर्द्धवार्षिक – 01 वार्षिक- 87, त्रिवर्षीय 02 तथा पंचवर्षीय-08) निर्धारित किये गये हैं।
नेहा जैन जिलाधिकारी द्वारा उक्त कार्यशाला में सहभागी समस्त जनपद स्तरीय अधिकारियों, ग्राम प्रधानों एवं ग्राम पंचायत सचिवों आदि को सतत विकास लक्ष्यों की ससमय पूर्ति किये जाने की अपेक्षा की गयी। उनके द्वारा यह सुझाव दिया गया कि सतत विकास लक्ष्यों की पूर्ति के स्वप्न को तभी साकार किया जा सकता है, जब 17 लक्ष्यों को समाहित करते हुए 09 विषयगत क्षेत्रों अर्थात गरीबी मुक्त और आजीविका उन्नत गांव बनाये जाने हेतु लाभार्थीपरक योजनाओं में समस्त पात्र लाभार्थियों का कवरेज हो, स्वस्थ गाव बनाये जाने हेतु समस्त लक्षित समूहों का आच्छादन हो, बाल हितैषी गांय बनाये जाने हेतु योजनाओं के अन्तर्गत शत-प्रतिशत नामांकन / पंजीकरण इत्यादि की कार्यवाही हो. पर्याप्त जलयुक्त गाव बनाये जाने हेतु सभी घरों में स्वच्छ एवं गुणवत्तायुक्त पेयजल की आपूर्ति हो, स्वच्छ एवं हरित गाव बनाये जाने हेतु वृक्षारोपण, शौचालयों का उपयोग एवं उचित कूड़ा प्रबन्धन हो आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचे वाला गांव बनाये जाने हेतु गुणवत्तायुक्त परिवहन सुविधाओं उचित प्रकाश व्यवस्था आदि अवस्थापना सुविधाएं विकसित हो. सामाजिक रूप से सुरक्षित गांव बनाये जाने हेतु केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के अन्तर्गत सभी पात्र व्यक्ति लाभान्वित हो सुशासन की स्थापना हेतु पंचायत समितियों की नियमित बैठकों के साथ ही सिटीजन चार्टर के अनुसार शासकीय सेवाओं की पहुच हो एवं महिला हितैषी गांव बनाये जाने हेतु शत्-प्रतिशत विवाह / जन्म पंजीकरण के साथ ही ग्राम की बालिकाए हाई स्कूल तक शिक्षित होने के साथ ही उन्हें डिजिटल और वित्तीय लेनदेन आदि का ज्ञान हो। यह विभागों के स्तर
पर वृहद एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर उसका समयबद्ध क्रियान्वयन किये जाने पर ही सम्भव हो सकता है। ग्राम प्रधान ग्राम पंचायत खेडाकुर्सी, विकास खण्ड-रसूलाबाद द्वारा किये गये अनुरोध के क्रम में जिलाधिकारी द्वारा पानी के बचाव एवं उसका अनुकूलतम उपयोग सुनिश्चित किये जाने हेतु उक्त ग्राम में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अन्तर्गत स्प्रिंकलर सेट का प्रदर्शन एवं स्थापना किये जाने हेतु उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग को निर्देश दिये गये। इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायतों में गठित समस्त 05 समितियों की नियमित बैठक कराने एवं जैव विविधता प्रबन्धन अर्थात बायोडायवर्सिटी रजिस्टर में ग्राम संसाधनों को अंकित कर उसका नियमित रूप से अद्यतनीकरण किये जाने की अपेक्षा भी की गयी।
सौम्या पाण्डेय, मुख्य विकास अधिकारी द्वारा सतत विकास लक्ष्य हेतु नामित किये गये समस्त नोडल अधिकारियों / जनपद स्तरीय अधिकारियों को नियमित रूप से निर्धारित प्रपत्रों पर त्रुटिरहित प्रगति विवरण अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय में ससमय उपलब्ध कराने के साथ ही एस०डी०जी० लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु शासन की मंशानुरूप कार्यवाही किये जाने की अपेक्षा की गयी।
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