लखनऊ/कानपुर देहात। शिक्षक नेताओं को बैठक के लिए सुबह व दोपहर में बायोमेट्रिक उपस्थिति से छूट दी गई है। बेसिक शिक्षा निदेशक की ओर से शासन के आदेश का हवाला देते हुए इस पर राहत दी गई है। सरकारी विभागों के मान्यता प्राप्त शिक्षक संघों के पदाधिकारियों को शासन, विभागाध्यक्ष, कार्यालयाध्यक्ष, मंडलायुक्त व डीएम के स्तर से उनकी मांगों के निराकरण के लिए आयोजित बैठकों में शामिल होना होता है। इसे देखते हुए कर्मचारी संगठनों की ओर से इस तरह की बैठकों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति से छूट देने की मांग की गई थी। बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने शासन के निर्देश का हवाला देते हुए संघ के पदाधिकारियों को बायोमेट्रिक उपस्थिति से छूट दिए जाने के निर्देश दिए हैं। आदेश आने के बाद शिक्षकों में आक्रोश फैल गया है क्योंकि वर्तमान समय में अधिकांश शिक्षक नेता अपने निजी स्वार्थ में लगे हैं और दलाली कर खूब रुपए कमा रहे हैं शिक्षक हित में कहीं भी दिखाई नहीं दिखते हालांकि कुछ शिक्षक संगठन शिक्षक हित में सदैव तत्पर रहते हैं। इतना ही नहीं शासन प्रशासन द्वारा शिक्षक और शिक्षक पदाधिकारियो में मतभेद पैदा करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। वहीं कुछ संगठनों के प्रदेश अध्यक्ष व महामंत्री एवं पदाधिकारी शिक्षक संघ के पदाधिकारीयों को बायोमेट्रिक उपस्थिति से छूट प्रदान किये जाने के आदेश का गोपनीय तरीके से समर्थन कर रहे हैं क्योंकि कुछ तथाकथित पदाधिकारी लगातार अधिकारियों नेताओं के साथ मिलकर इस बायोमेट्रिक आदेश से निजी स्वार्थ के लिए छूट पाना चाहते थे जिसका आदेश जारी कर दिया गया जो शिक्षक हित में बिल्कुल उचित नहीं है।
इससे शिक्षक समाज में असमानता, द्वेष और अविश्वास पैदा होना लाजमी है। शिक्षक संघ के पदाधिकारीयों को बायोमेट्रिक उपस्थिति से छूट के इस आदेश से पुरानी पेंशन को जिस तरह शासन प्रशासन द्वारा 2004 में संगठन के नेताओं को अपने पक्ष में करते हुए समाप्त कर दिया गया था और नवीन पेंशन को लागू कर दिया गया था। ठीक उसी प्रकार आज बायोमेट्रिक को शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियो को छूट देकर अध्यापकों का शोषण करने का पूरा सफल प्रयास किया जा रहा है। जब तक शिक्षक नेता शिक्षक समस्याओं से वंचित रहेगा तो शिक्षक समस्या को कैसे महसूस कर सकता हैं इसलिए यह जरूरी हैं की सभी शिक्षकों के लिए नियम समान हों। समस्त शिक्षक यह समझ लें कि अगर सभी शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष महामंत्री द्वारा इसका विरोध नहीं किया गया तो निश्चित रूप से आपके साथ शिक्षक संगठनों के पदाधिकारीयों द्वारा धोखा दिया जा रहा है। वे सिर्फ अपने निजी स्वार्थ के लिए ही नेतागिरी कर रहे हैं। जो शिक्षक संगठन ऐसे आदेश का विरोध न करें आप उन शिक्षक संगठनों का कदापि भी समर्थन न करें क्योंकि शिक्षक संगठन की ताकत शिक्षक ही होता है।
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