शिक्षा में रूपान्तरकारी बदलाव किये जाने की आवश्यकता पर यूनेस्को ने दिया बल
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और एक साझीदार संगठन ने बुधवार 5 अक्टूबर को विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर जारी अपने साझा वक्तव्य में ध्यान दिलाया है कि शिक्षा में अध्यापकों की केन्द्रीय भूमिका है और शिक्षकों के मूल्यवान कार्य के अनुरूप उनके लिये बेहतर वेतन व कामकाजी परिस्थितियों की भी व्यवस्था की जानी होगी।

कानपुर देहात,अमन यात्रा : संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और एक साझीदार संगठन ने बुधवार 5 अक्टूबर को विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर जारी अपने साझा वक्तव्य में ध्यान दिलाया है कि शिक्षा में अध्यापकों की केन्द्रीय भूमिका है और शिक्षकों के मूल्यवान कार्य के अनुरूप उनके लिये बेहतर वेतन व कामकाजी परिस्थितियों की भी व्यवस्था की जानी होगी। यह वक्तव्य संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन की महानिदेशक ऑड्री अजूले, अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक गिलबर्ट हूंगबो, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल और एजुकेशन इण्टरनेशनल के प्रमुख डेविड एडवर्ड्स की ओर से जारी किया गया है।
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यूएन एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों ने सभी देशों से यह सुनिश्चित करने का आहवान किया है कि शिक्षकों पर ज्ञान निर्माता व नीति साझीदार के तौर पर भरोसा किया जाए। शिक्षा व्यवस्था में रूपान्तरकारी बदलावों के लिये सशक्त, उत्साही व योग्य शिक्षकों व शिक्षाकर्मियों की आवश्यकता है क्योंकि विश्व के अनेक हिस्सों में कक्षाओं में भारी भीड़ है, शिक्षकों की संख्या कम है और उन पर काम का अत्यधिक बोझ है। वे निरुत्साहित हैं और उन्हें जरूरी समर्थन भी प्राप्त नहीं है। इसके परिणामस्वरूप अभूतपूर्व संख्या में शिक्षक अपना पेशा छोड़ रहे हैं और शिक्षक बनने की तैयारियों मे जुटे लोगों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है। शीर्ष अधिकारियों ने सचेत किया है कि यदि इन चुनौतियों से नहीं निपटा गया तो टिकाऊ विकास के चौथे लक्ष्य को हासिल करने के प्रयासों को धक्का पहुँचेगा जिसके तहत सर्वजन के लिये वर्ष 2030 तक गुणवत्तापरक शिक्षा सुनिश्चित किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।
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शिक्षकों के अभाव का सबसे अधिक असर दूरदराज के और निर्धन इलाकों में रहने वाली आबादी पर होता है, विशेष रूप से महिलाओं व लड़कियों और निर्बल व हाशिये पर धकेल दिये गए समुदायों पर पड़ता है। साझीदार संगठनों का कहना है कि विश्व भर में इस दशक के अन्त तक सार्वभौमिक आधारभूत शिक्षा के लिये प्राथमिक स्कूलों में दो करोड़ 44 लाख शिक्षकों और माध्यमिक स्कूलों में चार करोड़ 44 लाख शिक्षकों की आवश्यकता है।स्कूलों की कक्षाओं में छात्रों की संख्या बहुत अधिक है शिक्षकों पर भीषण बोझ है और शिक्षा प्रणालियों में कर्मचारियों की भी कमी है। 90 फीसदी माध्यमिक स्कूलों को शिक्षकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके मद्देनजर साझीदार संगठनों ने जोर देकर कहा है कि योग्य, समर्थन प्राप्त और उत्साही शिक्षकों को कक्षाओं में लाना और वहाँ उनकी मौजूदगी बनाए रखना, पढ़ाई-लिखाई में सुधार के लिये सबसे अहम उपाय हैं जिससे छात्रों व समुदायों का कल्याण होगा।
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