सबसे युवा प्रो.अरुण शुक्ल को मिलेगा शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार, जानिए- कैसे मिली ये उपलब्धि
शरीर पर दवाओं के दुष्प्रभाव को कम करने की दिशा में कार्य कर रहे आइआइटी कानपुर के प्रो.अरुण कुमार शुक्ला को शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार मिलेगा। उनका नाम रविवार को काउंसिल आफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की ओर से फाइनल हुआ है, उन्हें यह पुरस्कार फरवरी में मिलेगा। उनकी यह उपलब्धि बायोलाजिकल साइंस वर्ग में अब तक के सबसे युवा विशेषज्ञ के रूप में दर्ज हो जाएगी। घोषणा के साथ ही देश-विदेश से उन्हें बधाई संदेश मिल रहे हैं।

कानपुर, अमन यात्रा । शरीर पर दवाओं के दुष्प्रभाव को कम करने की दिशा में कार्य कर रहे आइआइटी कानपुर के प्रो.अरुण कुमार शुक्ला को शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार मिलेगा। उनका नाम रविवार को काउंसिल आफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की ओर से फाइनल हुआ है, उन्हें यह पुरस्कार फरवरी में मिलेगा। उनकी यह उपलब्धि बायोलाजिकल साइंस वर्ग में अब तक के सबसे युवा विशेषज्ञ के रूप में दर्ज हो जाएगी। घोषणा के साथ ही देश-विदेश से उन्हें बधाई संदेश मिल रहे हैं।
मूलत: कुशीनगर के रहने वाले 39 वर्षीय वैज्ञानिक प्रो. शुक्ला बायोलाजिकल साइंस एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग में कार्यरत हैं। वह संस्थान में 2014 से हैं। अब तक उनके कई शोध राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। अभी टारगेटेड मेडिसिन पर कार्य कर रहे हैं, जिसमें कुछ हद तक सफलता मिल चुकी है। यह दवा केवल रोग या समस्या पर ही असर करेगी। बाकी के शरीर के हिस्से पूरी तरह से सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने बीएससी गोरखपुर यूनिवर्सिटी, एमएससी जेएनयू और पीएचडी जर्मनी की फ्रैंकफर्ट यूनिवर्सिटी से किया। कुछ समय तक अमेरिका में शोध कार्य किया।
क्रायो ईएम फैसिलिटी से आसान होगी दवाओं की टेस्टिंग
प्रो.शुक्ला ने बताया कि वह क्रायो ईएम फैसिलिटी विकसित कर रहे हैं। यह प्रोटीन के बायोलाजिकल माडलिंग से सबंधित है। इसकी वजह से दवाओं की टेस्टिंग आसान हो जाएगी। यह तकनीक साइंस इंजीनियरिंग एंड रिसर्च बोर्ड के सहयोग से तैयार की जा रही है। जी-प्रोटीन कपल रिसेप्टर (जीपीसीआर) पर भी कार्य किया जा रहा है। इससे शरीर में किसी भी तरह की एंटीबाडी बनने, संक्रमण, रोग, दवा के प्रभाव का पता लग स
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