कानपुर देहात। सरकारी विद्यालयों में पत्रकार के रूप में अवांछित व्यक्तियों के पहुंचने और अनावश्यक रूप से विद्यालयों को बदनाम करने की शिकायत का हवाला देकर बेसिक शिक्षा अधिकारी रिद्धी पाण्डेय ने जिला सूचना विभाग को पत्र लिखा है जिसमें कहा गया है कि कतिपय शिक्षका द्वारा संज्ञानित कराया गया है कि कतिपय व्यक्ति एवं अपरिचित समूहों द्वारा स्वयं को मीडिया कर्मी बताते हुए विद्यालय जाकर शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं छात्र-छात्राओं की फोटो ली जाती है विभागीय अभिलेखों से छेडछाड करते हुए सूचनाएं मांगी जाती हैं भोजन बनाने के दौरान किचेन में प्रवेश किया जाता है जिससे किसी भी प्रकार की अनहोनी की आशंका रहती है।सम्बन्धित विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा सम्बन्धित व्यक्ति / पत्रकार से पहचानपत्र दिखाये जाने का अनुरोध किये जाने पर कथित पत्रकारों द्वारा अभद्रता की जाती है।
विद्यालय में छात्रों की उपस्थित में अध्यापकों के साथ अभद्र व्यवहार करने पर अध्यापक एवं बच्चें कुंठाग्रस्त होते हैं जिसका असर शिक्षण कार्य एवं बच्चों की मनोदशा पर पड़ता है साथ ही विद्यालय का महौल भी खराब होता है। उक्त प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए आपसे अनुरोध है कि जनपद कानपुर देहात के मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची एवं आपके कार्यालय द्वारा निर्गत उनके परिचयपत्र की प्रति उपलब्ध कराने के साथ सम्बन्धित पत्रकार को विद्यालय पहुंचने पर सर्वप्रथम अपना परिचयपत्र सम्बन्धित प्रधानाध्यापक को दिखाने हेतु अपने स्तर से निर्देशित करने का कष्ट करें तथा विद्यालय पहुंचने पर सम्बन्धित विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं अन्य स्टाफ से सामंजस्य बनाते हुए शांतिपूर्ण व्यवस्था के अन्तर्गत वांक्षित जानकारी प्राप्त करें जिससे विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों पर प्रतिकूल असर न पड़े तथा विद्यालय का माहौल दूषित न हो। प्रकरण जनहित व छात्रहित से सम्बन्धित होने के कारण आपका विशेष सहयोग आपेक्षित है।
बीएसए के इस पत्र के जारी होते ही पत्रकारों में आक्रोश व्याप्त हो गया है। पत्रकारों व सामाजिक कार्यकर्ताओं व राजनीतिक दलों के लोगों का कहना है कि बीएसए विद्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए आपातकाल जैसे आदेश जारी करवाकर प्रेस पर प्रतिबंध लगाना चाह रही हैं। लोगों का कहना है कि बीते कुछ दिनों में जिस तरह से सरकारी विद्यालयों में मिड डे मील, कंपोजिट ग्रांट का सही व्यय न करना, कायाकल्प, शिक्षकों का समय से स्कूल न आना और विद्यालय में रील बनाने जैसी कमियों को उजागर करने से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के पसीने छूट गए हैं। खुद ही एक आदेश जारी कर सरकार के मंशा के विपरीत पत्रकारों को रोकने का प्रयास किया जा रहा है ताकि इनके करतूत मीडिया के जरिए जनता तक या जनप्रतिनिधियों तक ना पहुंच सके।
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