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बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शिक्षक भर्ती फिलहाल नहीं, बेरोजगारों को करना होगा लंबा इंतजार

उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग में सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं को लंबा इंतजार करना होगा। प्रदेश सरकार फिलहाल परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती नहीं करेगी। ऐसा नहीं है कि इन स्कूलों में सभी पदों पर शिक्षक कार्यरत हैं बल्कि इन्होंने शिक्षामित्र और अनुदेशकों को शिक्षक मानते हुए छात्र शिक्षक अनुपात को मानक के अनुरूप बताया है।

Story Highlights
  • अनुदेशक-शिक्षामित्र को सरकार ने माना सहायक अध्यापक, फिर शिक्षकों के समान बेतन क्यों नहीं ?

लखनऊ / कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग में सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं को लंबा इंतजार करना होगा। प्रदेश सरकार फिलहाल परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती नहीं करेगी। ऐसा नहीं है कि इन स्कूलों में सभी पदों पर शिक्षक कार्यरत हैं बल्कि इन्होंने शिक्षामित्र और अनुदेशकों को शिक्षक मानते हुए छात्र शिक्षक अनुपात को मानक के अनुरूप बताया है।

बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को फिलहाल शिक्षक बनने का मौका नहीं मिलेगा। विधान सभा में अतारांकित प्रश्न पर मंत्री संदीप सिंह ने जवाब दिया कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक व छात्रों का अनुपात मानक के अनुसार पूर्ण है। उन्होंने जवाब में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के स्वीकृत, कार्यरत और रिक्त पदों की जानकारी भी दी है। परिषदीय विद्यालयों में वर्ष 2018 के बाद से शिक्षक भर्ती नहीं हुई है। प्रशिक्षित अभ्यर्थी लगातार भर्ती की मांग कर रहे हैं लेकिन उनकी मांग अब तक पूरी नहीं हुई। इधर पिछले दिनों बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के स्वीकृत और रिक्त पदों तथा रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी करने को लेकर सदन में प्रश्न पूछे गए थे। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने जवाब दिया कि प्राथमिक विद्यालयों में स्वीकृत पद 417886 के सापेक्ष प्रधानाध्यापक एवं सहायक अध्यापक के 85152 पद रिक्त हैं।

उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्वीकृत पद 162198 के सापेक्ष प्रधानाध्यापक एवं सहायक अध्यापक के 41338 पद रिक्त हैं। प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत 332734 शिक्षक तथा 147766 शिक्षामित्र की संख्या सम्मिलित करते हुए छात्र शिक्षक अनुपात 30:1 मानक के अनुसार पूर्ण है।

उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत 120860 शिक्षक एवं 27555 अनुदेशक की संख्या को सम्मिलित करते हुए छात्र शिक्षक अनुपात 35:1 मानक के अनुसार पूर्ण है। इस पर युवा मंच के अध्यक्ष अनिल सिंह ने खत्म किए गए शिक्षकों के पदों को बहाल करने की मांग की है। साथ ही यह भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के पारित आदेश के बाद शिक्षामित्र और अनुदेशक को बतौर सहायक अध्यापक नहीं माना जा सकता। इस कारण रिक्त पदों पर शिक्षक भर्ती की जानी चाहिए।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय सरवनखेड़ा में कार्यरत अनुदेशक ऋषभ बाजपेई का कहना है कि एक नियमित शिक्षक सरकार के बड़े वेतनमान पर शिक्षा देता है जबकि उसी स्थान पर उसी विषय को शिक्षामित्र मात्र दस हजार और अनुदेशक नौ हजार में शिक्षा देता है तो सरकार को किस शिक्षक पर भरोसा करना चाहिए। इस दोहरी रीति से सरकार का अरबों रुपये का फायदा होता है लेकिन क्या सरकार ने कभी यह सोचा कि बच्चों के भविष्य का निर्माण करने वाला व्यक्ति एक अकुशल श्रमिक से भी कम वेतन में बच्चों को शिक्षित करता है। अपने फायदे के लिए सरकार शिक्षामित्र एवं अनुदेशकों को शिक्षकों के समतुल्य बताने लगती है और जब समान कार्य के लिए समान मानदेय/वेतन की बात की जाती है तो फिर नए-नए नियम कायदे बताने लगती है। सरकार प्रशिक्षित नौजवान युवकों का चौतरफा शोषण कर रही है।

AMAN YATRA
Author: AMAN YATRA

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