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मानवता के मसीहा थे निरंकारी बाबा हरदेव निरंकारी बहन संतोषी

संत निरंकारी मिशन के पूर्व प्रमुख निरंकारी बाबा हरदेव सिंह मानवता के मसीहा थे मिशन की मानवता के कल्याण के लिए की गई सेवाओं को सम्मानित करते हुए जहां विश्व भर की सरकारी व संस्थाओं ने उनके प्रति आभार व्यक्त किया वहीं मिशन को संयुक्त राष्ट्र आर्थिक व सामाजिक परिषद की विशेष सिकाई इकोसॉफ्ट का सलाहकार का दर्जा प्रदान किया गया

भोगनीपुर कानपुर देहात। संत निरंकारी मिशन के पूर्व प्रमुख निरंकारी बाबा हरदेव सिंह मानवता के मसीहा थे मिशन की मानवता के कल्याण के लिए की गई सेवाओं को सम्मानित करते हुए जहां विश्व भर की सरकारी व संस्थाओं ने उनके प्रति आभार व्यक्त किया वहीं मिशन को संयुक्त राष्ट्र आर्थिक व सामाजिक परिषद की विशेष सिकाई इकोसॉफ्ट का सलाहकार का दर्जा प्रदान किया गया। निरंकारी बहन संतोषी सोमवार को निरंकारी बाबा हरदेव सिंह के स्मृति दिवस समर्पण दिवस के तहत निरंकारी सत्संग को संबोधित कर रही थी बाबा हरदेव सिंह महाराज द्वारा वृक्षारोपण खून दान कैंप सफाई अभियान जैसे सामाजिक कार्य किए गए ज्ञात हो कि निरंकारी मिशन के पूर्व प्रमुख बाबा हरदेव सिंह महाराज का 13 म ई 2016 को कनाडा में नश्वर शरीर छोड़कर ब्रह्म में लीन हो गए थे उनकी याद में 13 म ई को समर्पण दिवस के रूप में मनाया जाता है।

मानवता के मसीहा बाबा हरदेव सिंह ने महाराज ने दीवार रहित संसार का जो स्लोगन दिया था पूरे विश्व में विस्तार हुआ निरंकारी बाबा हरदेव सिंह पूरे विश्व में मानवता व प्रेम आपसी भाईचारा का जो संदेश दिया वह उल्लेखनीय है बाबा हरदेव सिंह महाराज आत्मा के परमात्मा के साथ एकत्रित भाव में आने की शिक्षा सारी दुनिया को देते रहे। मो ही तोही वही अंतर कैसा किया व्यवस्था को जीवंत कर देने की उनकी क्षमता ने लाखों दिलों को प्रभु से युक्त किया। नफरत निंदा और बैर के दुर्व्यवहार से मुक्त किया । बाबा हरदेव सिंह आध्यात्मिक जगत के दिव्या पद प्रदर्शन होते ही उनकी सामाजिक कार्यों भी बेमिसाल थे खराब होते पर्यावरण पिक उनके से जाहिर होती थी कि प्रदूषण भीतर हो या बाहर दोनों ही हानि कारक होते हैं बाबा हरदेव सिंह महाराज ने देशभर में रेलवे स्टेशन अस्पतालों ऐतिहासिक इमारत की सफाई का मार्गदर्शन से ही संभव हुआ।

निरंकारी बाबा हरदेव सिंह महाराज गुरु के रूप में मानवता के कल्याण के लिए 36 वर्षों तक कार्य किया बाबा हरदेव सिंह महाराज की सकारात्मक सोच रक्त नालियों में नहीं नाडियों में बहे। का ही परिणाम है जो 1986 से प्रारंभ रक्तदान अभियान में लाखों यूनिट रक्तदान करके मिशन की गिनती विश्व की अग्रणी रक्तदाता संस्थानों में अंकित करवाई गई। इस अवसर पर संतोष गुप्ता बहन उमा निशा ओम कांति बिट्टन बेबी आशा ज्ञानी आदि उपस्थित थे।

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Author: anas quraishi

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