कविता
।। सहज स्वभाव ।
।। सहज स्वभाव । सरल स्वभाव का होना चार चांद लगाना हैं व्यक्तित्व में । कोयले की खान में कोहिनूर की तरह दमकना हैं भरे जहान में ।

।। सहज स्वभाव ।
सरल स्वभाव का होना
चार चांद लगाना हैं व्यक्तित्व में ।
कोयले की खान में
कोहिनूर की तरह दमकना हैं भरे जहान में ।
लोग बहुत मिलते हैं सोचे बहुत मिलती हैं
जिसमें हो इंसानियत ज़िंदा वही इस दिल की दुनियां में
ताउम्र!
दिए बनकर जलते हैं ।।
दर्द का जो मरहम बनते हैं
दिल को चैन और सुकून से भरते हैं
ऐसे,
रहनुमा इस दिल की बगिया को
अपनेपन की रोशनी से बाग बाग सा करते हैं ।
कहने को तो ,
भरा पूरा ज़माना अपना सा हैं
पर,देखना ये बाकी हैं गालिब!
कौन,किसका कितना अपना सा हैं ।।
।। शुक्रिया ।।
स्नेहा कृतिसाहित्यकार, पर्यावरण प्रेमी और राष्टीय सह संयोजककानपुर उत्तर प्रदेश
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