जर्मनी से खींच लाया माटी का प्यार, अब बच्चों पर लुटा रहे दुलार
जर्मनी के फ्रेंकफार्ड शहर में रच-बस चुके बालकृष्ण दुबे को आखिर माटी का प्यार खींच लाया। बहुआ ब्लाक के सामियाना गांव में पले-बढ़े इस अप्रवासी भारतीय ने गांव पहुंच कर बच्चों का भविष्य संवारने का संकल्प लिया है.

फतेहपुर,अमन यात्रा : जर्मनी के फ्रेंकफार्ड शहर में रच-बस चुके बालकृष्ण दुबे को आखिर माटी का प्यार खींच लाया। बहुआ ब्लाक के सामियाना गांव में पले-बढ़े इस अप्रवासी भारतीय ने गांव पहुंच कर बच्चों का भविष्य संवारने का संकल्प लिया है. गांव के प्राथमिक स्कूल प्रथम को गोद लेते हुए यहां पढ़ने वाले बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए अनेक तरह के झूले व पठन-पाठन की सामग्री सौंपी। कहा कि जल्द ही वह यहां हाईटेक शिक्षा के लिए कंप्यूटर आदि भी लगवाएंगे
नगारो कंप्यूटर साफ्टवेयर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर सेवारत जिले का यह लाल अर्से से जर्मनी में हैं, लेकिन दिल आज भी हिंदुस्तान के लिए धड़कता है। वह कहते हैं कि उनकी मां भी परिषदीय स्कूल में शिक्षिका थीं, अब उनकी स्मृति में वह सामियाना स्कूल को एक माडल स्कूल बनाएंगे। इसके लिए जो भी खर्च होगा वह उसका खर्च उठाएंगे। उन्होंने स्कूल प्रशासन को स्लाइडर, शीशा, इंद्रधनुष, हाथी-घोड़े जैसे झूले सौंपे। स्कूल प्रशासन ने इन झूलों का शुभारंभ भी इन्हीं के हाथों करवाया। इस मौके पर स्कूल में प्रार्थना का पंचांग-फेज दो भी आयोजित हुआ। विजेताओं को मिष्ठान वितरण ग्राम प्रधान सोमदत्त द्वारा किया गया।
अप्रवासी भारतीय ने डीएम अपूर्वा दुबे द्वारा लागू प्रार्थना पंचांग की सराहना की और इसे एक बेहतर पहल बताया। इस मौके पर प्रधानाध्यापक बृजगोपाल दुबे, कामिनी शुक्ला, आकांक्षा मिश्रा, रागिनी, अंजू, नंद कुमार शर्मा उत्कर्ष दुबे सहित अनेक लोग रहे। पहल की जानकारी होने पर सीडीओ सत्य प्रकाश ने बीएसए संजय कुशवाहा को विद्यालय जाकर भ्रमण करने और स्कूल गोद लेने वाले अप्रवासी को जिला स्तरीय कार्यक्रम के दौरान सम्मानित करने का निर्देश दिया।
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