उज्जैन,अमन यात्रा : मनुष्य के पतन के कारणों को बारीकी से बताने-समझाने वाले, उनसे बचने के सरल तरीके बता कर भौतिक और आध्यात्मिक- दोनों तरक्की का मार्ग प्रशस्त करने वाले, इस समय के महान समाज सुधारक, मानव धर्म रूपी बगीचे के बागवान, इस समय के महापुरुष उज्जैन वाले पूरे समर्थ सन्त सतगुरु बाबा उमाकान्त जी महाराज ने बुद्ध पूर्णिमा 16 मई 2022 प्रातः काल में उज्जैन आश्रम से दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि बुद्धि कब खत्म होती है? जब आदमी होश में नहीं रह जाता। मदहोश जब रहेगा तब बुद्धि काम नहीं करेगी। बुद्धि नाशक नशा किसको कहते हैं? जिसमें होश में न रह जाए चाहे गांजा, अफीम, भांग, कोकीन या चाहे जो अन्य नशे की गोलियां आ गई हैं, इनको आप मत ग्रहण करना।
नशेड़ियों का साथ करोगे तो कोल्ड ड्रिंक, जूस आदि में डालकर धोखे से शराब, नशा पिला देते हैं-
नशेड़ी का साथ मत करना नहीं तो किसी न किसी दिन किसी न किसी तरीके से आपको नशा करा ही देगा। नशा छोड़ने वाले सतसंगियों ने बताया, सहकर्मी था, साथ में रहता था, कोका कोला में डालकर पहले शराब पिला देते थे। जब हल्का-हल्का नशा आने लगा फिर ज्यादा डालने लग गए।
नशे की आदत अगर एक झटके में नहीं छोड़ोगे तो ये मर्ज की तरह धीरे-धीरे हो जायेगा जानलेवा-
एक झटके में छोड़ी जाती है नशे की आदत। अगर एक झटके में नहीं छोड़ोगे, आज नहीं कल छोड़ेंगे, थोड़ा ले लें तो थोड़ा-थोड़ा करके ज्यादा हो जाएगा, पहले जितना था उससे भी ज्यादा हो जाता है। इसलिए बुराई को तुरंत खत्म करना चाहिए। बुराई को पालना नहीं चाहिए। जैसे कहा गया मर्ज को पालना नहीं चाहिए। कोई भी मर्ज हो उसका इलाज तुरंत कराना चाहिए जिससे मर्ज बढने न पावे। मर्ज को कमजोर नहीं मानना चाहिए। आदमी के विकास में, आगे बढ़ने में यह बहुत बड़ा ब्रेकर, ठोकर है। कोई भी नशे का सेवन आप मत करना जिससे बुद्धि खराब हो जाए।
नशा जब ज्यादा मात्रा में हो जाता है तो आदमी होश में नहीं रह जाता-
तंबाकू, बीड़ी, हुक्का में भी नशा होता है लेकिन उतना नहीं होता। शराब, गांजा, भांग में बहुत नशा होता है। जमीन से तंबाकू, गांजा पैदा होता है। दवाओं के लिए प्रकृति ने देन दी है। जब दवाओं में जड़ी-बूटी के रूप में प्रयोग किया जाता है तब फायदा होता है। जब ज्यादा मात्रा में हो जाये तो होश में नहीं रह जाता और उसकी आदत बन जाती है। तंबाकू से बने हुए मंजन से भी आदत बन जाती है। दिन भर दातों में लगाते रहते हैं। दांत साफ होते हैं, कीड़े दांत के मरते हैं लेकिन उसका रस जो अंदर जाता है वो नशा पैदा करता है। मंजन करने वाला 4-6 बार अगर मंजन न करे तो बेचैन रहता है, दिनभर जैसे नशेड़ी, शराबी बेचैन रहता है। सच पूछो तो कोई भी नशा हो, खराब होता है, नहीं करना चाहिए।
तीज त्यौहार आते हैं कमियों को दूर करने और बुराइयों को छोड़ने के लिए-
बहुत से दुकानदार सादा पान में थोड़ा सा तम्बाकू लगा देते हैं। खाने के बाद कहो तो कहते हैं गलती से हाथ में लगा रह गया होगा। अगले दिन एक दाना और। तीसरे दिन और लगा देते हैं। बस आदत बन जाएगी। तम्बाकू वाले पान की आदत बन गयी तो अब तो दुकान पर जाना ही जाना है, पैसा देकर आना ही आना है। खाने-खिलाने वाले पढ़ लेते हैं कि कैसा है, किस विचारधारा का है, बस वोही कहते हैं। तरह-तरह का प्रलोभन देते हैं- हाजमा सही हो जाता है, मस्ती-आनंद आता है, अरे नोट आने लग जाएंगे, थकान नहीं होगी, लगन लग जायेगी, तरह-तरह से तारीफ करते हैं। बस आदमी कहता है आज टेस्ट करते हैं, धीरे-धीरे टेस्ट में ही नष्ट हो जाता है। तो ऐसे नशे का सेवन मत करना जिससे बुद्धि भ्रष्ट हो जाये। त्यौहार आते हैं कमियों को दूर करने, बुराइयों को छोड़ने के लिए। इसलिए आज संकल्प बनाओ और अपनी बुराइयों को छोड़ो।
बाबा उमाकान्त जी महाराज के वचन-
सतगुरु के दया की दृष्टि से कर्म कर्जा आसानी से अदा हो जाता है। देशभक्त बनो और देश हित में काम करने वालों की मदद करो। सन्त सतगुरु जीवों के कर्मों को काटने के लिए समय-समय पर उपाय बताते रहते हैं। जब शाकाहारी हो जाओगे, जानवरों का कटना बंद हो जाएगा, हवा-पानी शुद्ध होगी तभी इन बीमारियों से निजात मिलेगी। जीवन दान देने वाली औषधियों को आप घर के गमलों में भी लगा सकते हो।
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