कानपुर देहात, अमन यात्रा : वर्तमान में परिषदीय शिक्षकों पर कार्यवाही सामन्य बात होती जा रही है। शिक्षा विभाग वैसे भी अपनी करतूतों के बारे में चर्चा में रहता रहा है लेकिन अगर मामला बच्चे या कुत्ते को स्कूल में बंद करके चले जाने का हो तो यह बहुत बड़ी लापरवाही कही जा सकती है। आए दिन ऐसी खबरें आती रहती हैं कि फलाने जिले में मास्टर जी बच्चे को स्कूल में बंद करके चले गए तो कहीं से यह खबर आती है कि मास्टर जी कुत्ते को कक्षा कक्ष में बंद करके चले गए। इन सब से बचने के लिए शिक्षकों को विद्यालय बंद करते समय कुछ बिन्दुओं का ख्याल करना होगा नहीं तो आपको यह लापरवाही कार्यवाही की जद में ला सकती है।
विद्यालय बंद करने हेतु कौन है अधिकृत
विद्यालय का संस्था प्रमुख विद्यालय का प्रधानाध्यापक होता है और विद्यालय के विभिन्न दायित्व प्रधानाध्यापक के होते हैं। यद्यपि प्रधानाध्यापक यह दायित्व सभी कक्षाध्यापकों को दे सकते है परन्तु अंत में स्वयं एक बार जरुर देख लें।
विद्यालय बंद करते समय रखें इन बातों का ध्यान
ध्यान दे कि कोई बच्चा कक्षा में सोया तो नहीं है। प्रायः छोटे बच्चे कक्षा में चटाई या बेंच पर सो जाते हैं तो कक्षा में पीछे जरुर चेक कर लें। अगर ऐसा होता है और कोई बच्चा कक्षा में बंद हो जाता है तो निश्चित सभी अध्यापकों पर कार्यवाही हो सकती है। यह भी देख लें कि कोई जानवर अथवा कुत्ता तो कक्षा में नहीं है। कई बार ऐसा होता है कि कुत्ते कक्षा में बंद हो जाते हैं और रात में चिल्लाने पर ग्रामीण स्कूल खुलवा कर निकलवाते हैं और उच्च अधिकारीयों को शिकायत भी करते हैं तो इसको ध्यान दें कि कोई जानवर विद्यालय में बंद न हो जिन विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं हैं उनमें प्रधानाध्यापक उक्त तथ्यों का पालन कर कार्यवाही से बच सकते हैं।
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