पर्यावरण बनेगा स्कूली शिक्षा का अहम हिस्सा
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत नया स्कूली पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। ऐसे में मिशन लाइफ से जुड़ी पहल को भी स्कूलों में अलग-अलग स्तर पर शामिल करने की दिशा में काम चल रहा है। हाल ही में जारी किए गए स्कूलों के बुनियादी स्तर के नए कैरीकुलम फ्रेमवर्क में भी पर्यावरण को पर्याप्त जगह दी गई है।

अमन यात्रा, कानपुर देहात। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत नया स्कूली पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। ऐसे में मिशन लाइफ से जुड़ी पहल को भी स्कूलों में अलग-अलग स्तर पर शामिल करने की दिशा में काम चल रहा है। हाल ही में जारी किए गए स्कूलों के बुनियादी स्तर के नए कैरीकुलम फ्रेमवर्क में भी पर्यावरण को पर्याप्त जगह दी गई है।
इस दौरान जिन अहम पहलुओं को स्थान दिया गया है उनमें ऊर्जा और पानी की बचत, सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करना, स्वच्छता पर जोर देना, मौसम अनुकूल खान-पान, कचरा प्रबंधन, स्वस्थ जीवन शैली के लिए जरूरी उपाय, ई-वेस्ट को कम करना जैसे विषयों पर फोकस किया गया है। आने वाले स्कूली पाठ्यक्रम में यह सभी विषय देश की नई पीढ़ी को किसी न किसी रूप में पढ़ने को मिलेंगे। सरकारी स्कूलों से स्कूली पाठ्यक्रम में पीएम के मिशन लाइफ को शामिल करने की मुहिम पर काम कर रहे विशेषज्ञों की मानें तो जीवनशैली एक आदत है जो शुरू से जैसी बन जाती है वैसी ही लगभग अंत तक रहती है। ऐसे में समाज बच्चों में यदि शुरुआत से ही पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली के प्रति रुझान पैदा कर दिया जाए या फिर उन्हें इससे होने वाले फायदे और नुकसान के प्रति सचेत कर दिया तो निश्चित ही वह इस पर अमल करेंगे। इस कारण से शुरुआत से ही बच्चों को पर्यावरण के बारे में जानकारी होना आवश्यक है।
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