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भारत उत्थान न्यास द्वारा आयोजित साधारण सभा की राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई संपन्न

भारत उत्थान न्यास की साधारण आमसभा के अवसर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: विश्व कल्याण और हिन्दू दर्शन एवम् सम्मान समारोह आरोह फाउंडेशन विठूर, कानपुर में भव्यता से संपन्न हुआ।

Story Highlights
  • हिंदू दर्शन एवं सम्मान समारोह आयोजित
सुशील त्रिवेदी, कानपुर देहात :  भारत उत्थान न्यास की साधारण आमसभा के अवसर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: विश्व कल्याण और हिन्दू दर्शन एवम् सम्मान समारोह आरोह फाउंडेशन विठूर, कानपुर में भव्यता से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में 70 से अधिक लोगों ने विभिन्न राज्यों से हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. शशि अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। न्यास के केन्द्रीय सचिव, कृष्ण कुमार जिंदल ने विभिन्न क्षेत्रों में न्यास द्वारा द्वारा किए जा रहे कार्यों से सभी को अवगत कराया। उन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत किया। सत्र का संचालन डॉ. रचना पांडेय ने किया। अकादमिक सत्र में डॉ. भारती चौहान की अध्यक्षता में पूजा श्रीवास्तव, राजेश हल्लीकर, अधिवक्ता संदीप जिंदल, उमा विश्वकर्मा, निवेदिता चतुर्वेदी, ने अपने प्रपत्र और वक्तव्य प्रस्तुत किए तथा मंच संचालन सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता, सुमित्रा चौधरी ने किया।
समापन सत्र में केन्द्रीय मंत्री, डॉ. शशि अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत व न्यास के उद्देश्यों को सभी के मध्य रखा। केन्द्रीय अध्यक्ष, सुजीत कुंतल के संचालन में विशिष्ट अतिथि प्रो. हरीश अरोड़ा ने भारतीय जीवन को देखने की दृष्टि के तीन आधार बताए- सामाजिक, आभ्यंतरिक और आध्यात्मिक। भारतीय जीवन-दर्शन भी इसी पर ही केंद्रित है। यही हिन्दू दर्शन भी है और इसी में विश्व कल्याण की भावना भी निहित है। सामाजिक स्तर पर मनुष्य की जीवन व्यवस्था वैश्विक संबंधों पर आधृत है और वसुधैव कुटुंबकम का भाव भारत की सनातन संस्कृति का प्रमुख हिस्सा है। यह हमारी आभ्यंतरिक चेतना का मुख्य स्तम्भ है जो मनुष्य समाज के नैतिक मूल्यों का निर्माण करता है। इस प्रक्रिया में चैत्सिक वृति मनुष्य को आध्यात्म की ओर ले जाती है।
आध्यात्मिक होकर ही मनुष्य जीवन के साथ तादात्मय बनाता है। हिन्दू धर्म की निरन्तरता ने ही उसे विश्व के सबसे प्राचीन धर्म के रूप में स्वीकृति और उसकी विश्व-कल्याणकारी विचारधारा “लोकः समस्त: सुखनो भवन्तु” के कारण ही विश्व में आज भी यह सनातन धर्म अपनी अस्मिता को बनाए रखे है। यह किसी एक व्यक्ति या धर्म-ग्रंथ के विचारों से नहीं बनी बल्कि वेदों, पुराणों, असंख्य धर्मशस्त्र ग्रंथों और मीमांसाओं आदि से बनी है और आज भी अमर है। चेन्नई की डॉ. राजलक्ष्मी कृष्णन और कर्मयोगी स्वामी विवेकानंद मिशन के मुख्य अधिष्ठाता, स्वामी कर्मानंद और देवीपाटन के मंडल प्रबंधक, डॉ अनिल मिश्रा, ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को विषय से जोडकर सभी को प्रेरित करने का कार्य किया।
लखनऊ विश्वविद्यालय, सांख्यिकी विभाग की प्रो. शीला मिश्रा ने सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आज जब पूरा विश्व स्वार्थपरता के लहर से आक्रांत युद्ध, आतंकवाद, भ्रष्टाचार, अनैतिकता तथा अनाचार से जूझ रहा है ऐसे में मानव और प्रकृति के अन्योनान्य सम्बन्धो पर आधारित समृद्धि, शांति, सामंजस्य तथा सह अस्तित्व का मार्ग प्रशस्त करने वाली भारतीय दर्शन पर आधारित आदर्श जीवन शैली ही है जिसके प्रचार- प्रसार एवं अनुसरण से विश्व की तमाम समस्याओं का निराकरण संभव है।
सम्मान समारोह के अवसर पर माँ भारती सेवा सम्मान प्रो. शीला मिश्रा, प्रो. हरीश अरोड़ा, डॉ. राजलक्ष्मी कृष्णन को प्रदान किया गया। राष्ट्र सेविका सम्मान डॉ. मंजु लता श्रीवास्तव, रंजना यादव, डॉ. द्रोपती यादव, बिन्नी कुमारी बाला, सीमा वर्णिका, डॉ.अरूणा सिंह, असि. प्रोफेसर सरला चक्रवर्ती, पायल पाराशर, बालिका सेन गुप्ता, श्रीमती कंचन मिश्रा, जया बालकृष्ण उभे, डॉ. लक्ष्मी शर्मा को प्रदान किया गया राष्ट्र सेवी सम्मान डॉ. सीताराम आठिया, खुशवंत कुमार माली, श्रीजी रमण योगी महाराज, डॉ. काकानि श्रीकृष्ण को तथा न्यास सेवा सम्मान कृष्ण कुमार जिंदल, डॉ. शशि अग्रवाल, पूजा श्रीवास्तव को प्रदान किया गया। यहां अतिथियों द्वारा न्यास की वार्षिक स्मारिका न्यास प्रवाह का विमोचन भी किया गया। यहां न्यास के बरेन सरकार, अलका रानी, मंजुला गुप्ता, डॉ. नरेन्द्र पांडेय, कमल राय, आदि उपस्थिति रहे।
AMAN YATRA
Author: AMAN YATRA

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