दीनी तालिमी बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने शिक्षा के मौलिक अधिकारों को लेकर की प्रेस कॉन्फ्रेंस
जमीअत उलेमा तहसील बिन्दकी के द्वारा बिन्दकी ईदगाह के सामने एक निजी प्रतिष्ठान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया इस प्रेस कांफ्रेंस को दीनी तालीमी बोर्ड के अध्यक्ष मुफ़्ती अफफान मंसूरपूरी ने सम्बोधित किया।

- समाज के सभी वर्गों के बच्चों के लिए शिक्षा देने के लिए किया जागृत
- घृणित शब्दों का प्रयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए, इस्लाम मे इसकी बिल्कुल इजाजत नहीं- मुफ़्ती अफफान मंसूरपूरी
- बच्चियों की शिक्षा पर ज्यादा ध्यान देना हमारा नैतिक व धार्मिक कर्तव्य
अमन यात्रा, बिन्दकी। जमीअत उलेमा तहसील बिन्दकी के द्वारा बिन्दकी ईदगाह के सामने एक निजी प्रतिष्ठान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया इस प्रेस कांफ्रेंस को दीनी तालीमी बोर्ड के अध्यक्ष मुफ़्ती अफफान मंसूरपूरी ने सम्बोधित किया। उन्होंने कहा की शिक्षा बच्चों और बच्चियों का मौलिक अधिकार है जितनी शिक्षा बच्चों के लिए जरूरी है उससे दस गुना ज्यादा बच्चियों के लिए जरूरी है। इसलिए हमें बच्चियों की शिक्षा पर ज्यादा ध्यान देना चाहिये।पत्रकारों के तालिबान के नजरिये पर सवाल करने पर उन्होंने कहा तालिबान के नजरिये से हमें क्यों देख रहे हैं, हमें तालिबान और पाकिस्तान से जोड़ने की कोशिश ना करें। हम हर तरह के अत्याचार के खिलाफ हैँ। तो वहीं हिजाब मामले पर कहा की हिजाब मुस्लिम महिलाओं का धार्मिक अधिकार है यदि किसी महिला को हिजाब को धारण करने से रोका जाये तो यह हमारे संविधान के भी खिलाफ है। हमें किसी के भी धार्मिक प्रतीकों के साथ छेड़छाड़ करने का अधिकार नहीं है।
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समान नागरिकता कानून के प्रश्न पर मुफ्ती अफ्फान ने कहा की आज ही इसकी चर्चा क्यों हो रही है,जब हमारा मुल्क स्वतंत्र हुआ उस समय हमारे पूर्वजों ने जो संविधान बनाया उसमें सभी बातों का ध्यान रखा गया तो आज इसकी जरूरत क्यों आ पड़ी।पत्रकारों द्वारा हेट स्पीच पर सवाल करने पर मुफ्ती ने कहा घृणित शब्दों का प्रयोग कहीं नहीं होना चाहिये मोहब्बत और प्रेम की भाषा का प्रयोग करना चाहिये जिससे लोगों के दिलों को जीता जा सकता है। कोई ऐसी बात बोलना जिससे किसी का दिल दुख रहा हो यह इस्लाम के खिलाफ है। उन्होंने कहा की हम पिछली सरकारों से ही अपने बुनियादी हकों का मुतालबा कर रहें हैँ इस भाजपा सरकार में ज़्यादा बदलाव नही हुआ है पिछली सरकारों मे हकतल्फी कम हुई इस सरकार मे कुछ ज्यादा हो रही हैं। उन्होंने कहा हमारी मस्जिदों और मदरसों के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं जिस किसी को भी किसी भी प्रकार की गलतफहमी हो वह आकर दूर कर सकतें हैं।
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जनसंख्या नियंत्रण कानून के प्रश्न पर मुफ्ती ने कहा जनसंख्या नियंत्रण कानून से ज्यादा ध्यान अल्पसंख्यको की शिक्षा पर सरकार को देना चाहिये जब समाज शिक्षित होगा तो वह स्वयं इस विषय पर चिंतित होगा। तो वहीं पत्रकारों ने शादियों पर बजने वाले डीजे पर हाफिज व मौलानाओं के द्वारा निकाह न पढ़ाने व शादियों में डीजे पूर्ण रूप से सख्ती कर बन्द करने पर जोर दिया जा रहा है तो फिर मोहर्रम में बज रहे ढोल ताशों व डीजों पर उतनी सख्ती क्यों नहीं की जा रही जिस तरह शादियों में निकाह नहीं पढ़ाया जा रहा उसी तरह ढोल ताशे बजाने वालों की नमाज जनाजा न पढ़ाकर कर कठोर सख्ती बरती जाए.
जिस पर मुफ्ती ने मुस्कुराते हुए गोलमोल जवाब देते हुए कहा की ऐसे लोगों पर सख्ती बरतनी चाहिए हम सख्ती बरतते हैं कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। इस मौके पर मुख़्य अतिथि के रूप में महाराष्ट्र से आए मुफ़्ती हुजैफ़ा कासमी,हाफिज शाहबाज (जिला महासचिव),अब्दुल्लाह खान कासमी (तहसील महासचिव),ग्राम प्रधान हाफ़िज़ अब्दुल अलीम, हाफ़िज़ अंसार,मौलाना मोहम्मद अहमद,हाफ़िज़ अब्दुल रहमान,सदरुद्दीन सेठ, छोटू सेठ,साहब दाद ,उसामा खान,मारूफ खान,मेराज अंसारी आदि लोग उपस्थित रहे।
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