हॉट टॉपिक बनी पुरानी पेंशन योजना
पुरानी पेंशन की बहाली का मुद्दा राजनीतिक गलियारे में रफ्तार पकड़े हुए है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि देश में सरकारी कर्मचारियों का वोट बैंक प्रतिशत अत्यधिक है इनका झुकाव जिस ओर हो गया वही पार्टी अपनी सरकार बनाने में कामयाब हो जाती है।

- पुरानी पेंशन की बहाली का मुद्दा राजनीतिक पार्टियों के लिए बन गया सबसे अहम
कानपुर देहात। पुरानी पेंशन की बहाली का मुद्दा राजनीतिक गलियारे में रफ्तार पकड़े हुए है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि देश में सरकारी कर्मचारियों का वोट बैंक प्रतिशत अत्यधिक है इनका झुकाव जिस ओर हो गया वही पार्टी अपनी सरकार बनाने में कामयाब हो जाती है। अगले साल कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और उसके अगले साल यानी 2024 में लोकसभा चुनाव हैं। इसी बीच अटकलें तेज हो गई है कि केंद्र सरकार नई पेंशन योजना (एनपीएस) खत्म करने जा रही है। सरकार फिर से पुरानी पेंशन स्कीम (ओपीएस) लागू करने का विचार कर रही है। केंद्र सरकार का यह फैसला राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्य में लागू पुरानी पेंशन योजना के बीच लिया गया है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्य के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना के तहत फायदा मिल रहा है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा जोरों पर है कि केंद्र अपने कर्मचारियों को भी ओपीएस का लाभ देगा।
दरअसल सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से वायरल हो रही हैं कि मोदी सरकार अगले साल मार्च 2023 से सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम के तहत लाने का फैसला करने पर विचार कर रही है। वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि सरकार की नई पेंशन योजना से कर्मचारी नाराज चल रहे हैं ऐसे में केंद्र ने पुरानी पेंशन योजना को लागू करने का निर्णय लिया है। हालांकि सरकार से जुड़े आधिकारिक एजेंसी ने कहा कि इस वायरल खबर में कोई दम नहीं है। इसमें सब कुछ फर्जी है। पीआईबी फैक्ट चेक ने ऑफिशियल ट्विटर से ट्वीट किया कि सोशल मीडिया पर वायरल खबर पूरी तरह से भ्रामक है। केंद्र सरकार की ओर से पुरानी पेंशन योजना लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यह पूरी तरह से निराधार, भ्रामक और बेबुनियाद है। दरअसल देश के हर राज्य में सरकारी कर्मचारियों की बड़ी संख्या होती है। यह किसी भी सरकार को बनाने और बिगाड़ने में अहम रोल अदा करते हैं। यानी राज्य में सरकारी कर्मचारी वर्ग बहुत बड़ा वोट बैंक है। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों को इस मुद्दे पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।जिन जिन राज्यों में अभी हाल ही में विधानसभा के चुनाव हुए हैं उनमें भी पुरानी पेंशन का मुद्दा सर्वोपरि रहा है। सरकार बनाने में सरकारी कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
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