शहर का दर्द: अंधेरे, गड्ढों और जल संकट से जूझता कानपुर
कानपुर की नगर निगम व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कानपुर की नगर निगम व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के लोग पानी की कमी, खराब सड़कों और अंधेरी गलियों से परेशान हैं। बारिश के बाद हालात और भी खराब हो गए हैं, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
सड़कों का बुरा हाल और रोशनी का अभाव
कानपुर नगर निगम के ज़्यादातर वार्डों में सड़कें चलने लायक नहीं हैं। गड्ढों की वजह से लोग अक्सर घायल हो रहे हैं। राम गोपाल चौराहा से जरौली गांव की सड़क इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यहाँ की ज़्यादातर **एलईडी लाइटें** खराब हैं, जिससे रात में अँधेरा रहता है और दुर्घटनाओं के साथ-साथ लूटपाट की घटनाएँ भी बढ़ गई हैं। 33 एमआईजी से 38 एमआईजी तक भी यही हाल है, जहाँ सभी स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं।
शिकायतों पर नहीं हो रही कार्रवाई
सामाजिक कार्यकर्ता राजेश बाबू कटियार ने इस समस्या को कई बार उठाया है। उन्होंने वार्ड 82 के पार्षद को, नगर निगम के **टोल-फ्री नंबर** पर, और यहाँ तक कि किदवई नगर स्थित नगर निगम के जोन 3 के अधिकारियों को भी लिखित में शिकायत दी है। अधिकारियों ने एक हफ्ते में समस्या हल करने का वादा किया था, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।
जनता में गुस्सा और अधिकारियों की मनमानी
राजेश बाबू कटियार का कहना है कि सरकारी विभागों में बैठे अधिकारी जनता की समस्याओं को नज़र अंदाज़ कर रहे हैं। इस लापरवाही के कारण लोग परेशान हैं और उन्हें चोरी, छीना-झपटी और सड़क दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। थक-हारकर उन्होंने मुख्यमंत्री को भी इस बारे में पत्र लिखा है।
त्योहारी मौसम करीब है, लेकिन शहर की दुर्दशा को देखते हुए लोगों में आक्रोश है। शहरवासी उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही उनकी बुनियादी समस्याओं का समाधान होगा।
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