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कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है-योग गुरू डॉ चैतन्य

कानपुर। इस संस्था में कभी भी "गुरु"और "शिष्य" की परंपरा नहीं रही,फिर भी मैंने प्रत्येक वर्ष "गुरु पूर्णिमा"कार्यक्रम का आयोजन किया. सामान्यतया गुरु पूर्णिमा पर्व का संबंध गुरु की पूजा-अर्चना एवं दान से ही संबंधित रहा.शास्त्रों में यज्ञ ,दान और तप की महिमा बताई गई है,जिसमैं यज्ञ और तप से तो यहां का साधक योग कर उसके लाभ से लाभान्वित हो जाता है,किंतु दान की प्रवृत्ति से वंचित रह जाता है.

Story Highlights
  • विवेक श्रृष्टि अयोध्या धाम में संपन्न होगा गुरु पूर्णिमा उत्सव
  • दान की राशि का उपयोग समाज सेवा के लिए

सुशील त्रिवेदी अयोध्या / कानपुर। इस संस्था में कभी भी “गुरु”और “शिष्य” की परंपरा नहीं रही,फिर भी मैंने प्रत्येक वर्ष “गुरु पूर्णिमा”कार्यक्रम का आयोजन किया. सामान्यतया गुरु पूर्णिमा पर्व का संबंध गुरु की पूजा-अर्चना एवं दान से ही संबंधित रहा.शास्त्रों में यज्ञ ,दान और तप की महिमा बताई गई है,जिसमैं यज्ञ और तप से तो यहां का साधक योग कर उसके लाभ से लाभान्वित हो जाता है,किंतु दान की प्रवृत्ति से वंचित रह जाता है.इसी की पूर्ति के लिए वर्ष में कम से कम एक बार इस संस्था के द्वारा गुरु पूर्णिमा का आयोजन करना अपरिहार्य हो जाता है.मनुष्य लाभ तो चाहता है, लेकिन लाभ पाने के तरीके से अनभिज्ञ है.कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है,लेकिन मनुष्य कुछ खोने का साहस नहीं जुटा पाता है और इसी कारण जीवन पर्यंत कुछ पाने की लालसा से जीवन के अंत तक पहुंच जाता है.

आज का मनुष्य चतुर भी बहुत है.पहले तो वह अपनी आय का न्यूनतम प्रतिशत भी किसी संस्था को दान नहीं करना चाहता है और यदि करता भी है तो यह अपेक्षा भी करता है कि उसका पूर्ण सदुपयोग हो.हमारी संस्था”श्याम-साधनालय” को मिली सभी धनराशियों का उपयोग समाज-सेवा में ही किया जाता है,जिसका प्रत्यक्ष/ परोक्ष लाभ दान करने वाले को ही मिलता है और यह प्राप्त धनराशि सर्वदा व्यय की गई धनराशि से कम ही रहती है.

इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति हेतु इस वर्ष भी दिनांक 3 जुलाई 2023 को कौशलपुरी योग केंद्र पर प्रातः 5:30 से 7:00 तक व तदुपरांत पूरे दिन विवेक सृष्टि परिसर में कार्यक्रम आयोजित होता रहेगा,जिसमें आप सादर आमंत्रित हैं.कृपया उक्त कार्यक्रम में स्वयं अपने परिवारी-जन तथा अपने परिचित/अपरिचित समस्त जनों सहित उपस्थित होने का कष्ट करें और जो लाभ आपको मिला है उससे सभी को लाभान्वित कराना सुनिश्चित करें क्योंकि मेरा व्यक्तिगत अनुभव रहा है कि जिन्होंने भी दान की परंपरा को बना रखा है उन्हें अवश्य लाभ हुआ है।

anas quraishi
Author: anas quraishi

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