रेडियो से मोबाइल तक पहुंचा आकाशवाणी गोरखपुर का सफर, खूब सुने जा रहे गोरखपुर के कार्यक्रम
टीवी के बढ़ते वर्चस्व के चलते रेडियो का दौर खत्म हो जाने की वजह से अपनी पहचान खो चुका आकाशवाणी का गोरखपुर केंद्र एक बार फिर लोगों तक पहुंचने लगा है। पहले के मुकाबले उसकी सहज पहुंच की वजह वह बदलाव है, जो आज के माहौल की डिमांड है।

गोरखपुर,अमन यात्रा । टीवी के बढ़ते वर्चस्व के चलते रेडियो का दौर खत्म हो जाने की वजह से अपनी पहचान खो चुका आकाशवाणी का गोरखपुर केंद्र एक बार फिर लोगों तक पहुंचने लगा है। पहले के मुकाबले उसकी सहज पहुंच की वजह वह बदलाव है, जो आज के माहौल की डिमांड है। चूंकि अब रेडियो कम ही घरों में है, इसलिए केंद्र ने घर-घर तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए मोबाइल फोन का सहारा लिया है क्योंकि आज वह रह व्यक्ति के हाथ में है। ऐसे में आज हर व्यक्ति आकाशवाणी गोरखपुर का श्रोता बन चुका है।
समय की मांग के मुताबिक बदलाव से फिर लोकप्रिय हो रहा आकाशवाणी गोरखपुर
इस बदलाव की चर्चा इसलिए भी मौजू है कि आज ही के दिन 1974 में गोरखपुर आकाशवाणी केंद्र की आवाज रेडियो के माध्यम से पहली बार हर घर में गूंजी थी। वो समय वह था जब ‘303.03 मीटर यानी 909 किलोहर्ट्ज पर यह आकाशवाणी का गोरखपुर केंद्र है’, सुनने के लिए श्रोता बेताब रहा करते थे। यह बेताबी केंद्र से 500 किलोमीटर तक की दूरी तक के श्रोताओं में हुआ करती थी। क्योंकि वह कोई छोटा-मोटा केंद्र नहीं था बल्कि उसकी क्षमता 100 किलोवाट थी। करीब तीन दशक पर श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाले आकाशवाणी केंद्र के बुरे दिन तब शुरू हो गए, जब पहले दूरदर्शन और बाद निजी टीवी चैनलों ने घरों में पैठ बना ली। बाद में हर हाथ तक पहुंचे स्मार्ट फोन ने इसकी रही-सही कसर भी पूरी कर दी।
उधर मशीनों के जर्जर होने से गोरखपुर केंद्र इस बदलाव के दौर में साथ चलने में खुद को अक्षम पाने लगा। इसे लेकर बात जब दिल्ली मुख्यालय पहुंची तो इसे फिर से लोकप्रिय बनाने की कवायद शुरू हो गई। कवायद में यह बात सामने आई कि रेडियो लोगों के घरों से गायब हो चुके हैं। अब अगर किसी माध्यम से लोगों तक फिर से रेडियो की आवाज पहुंचाई जा सकती है, वह है एफएम या फिर एप। ये दोनों ही स्मार्टफोन पर चलते हैं। जैसे ही यह लागू हुआ गोरखपुर आकाशवाणी के श्रोताओं की संख्या एक बार फिर बढ़ चली है।
आज आकाशवाणी गोररखपुर को सुनने के हैं तीन माध्यम
इस समय इच्छुक श्रोता तीन तरह से आकाशवाणी गोरखपुर के कार्यक्रम सुन सकते हैं। पहला माध्यम है एमएम, जिससे स्थानीय कार्यक्रम बेहद साफ सुनाई दे रहे हैं। दूसरा माध्यम मीडियम वेब का ‘303.03 मीटर यानी 909 किलोहर्ट्ज है, जिसे रेडियो पर ट्यून करके सुना जा सकता है। इसके लिए 10 किलोवाट का मोबाइल ट्रांसमीटर लगाया गया है। तीसरा विकल्प एप है। ‘न्यूजआनएयर’ नाम के एप पर देश के सभी आकाशवाणी केंद्रों के साथ्ज्ञ गोरखपुर केंद्र भी मौजूद है। यानी आज दो ऐसे माध्यम है, जिन्हें मोबाइल से किसी स्थान पर किसी समय सुना जा सकता है।
कई जिलों में स्थापित हो रहे हैं एफएम स्टेशन
गोरखपुर जब रेडियो स्टेशन चूंकि 100 किलोवाट का था, सो उसकी आवाज लंबी दूरी तय करती थी। अब प्रसारण का 10 किलोवाट के मोबाइल ट्रासंमीटर से हो रहा है, जो प्रसारण का दायरा भी छोटा हुआ है। इस कमी को पूरा करने के लिए देवरिया, महराजगंज और आजमगढ़ में एफएम आकाशवाणी केंद्र बनाए जा रहे हैं। महाराजगंज में तो 10 किलोवाट का स्टेशन बन रहा है, जिससे उसकी आवाज की पहुंच नेपाल तक हो।
लोक परंपरा और कला का संरक्षण भी आकाशवाणी की जिम्मेदारी है। एप और एफएम के माध्यम से हम इस जिम्मेदारी और बेहतर तरीके से निभा पा रहे हैं। समय की मांग के मुताबिक प्रसारण के तकनीकी बदलाव से आकाशवाणी का गोरखपुर केंद्र एक बार फिर लोकप्रिय हो रहा है। – डा. नीरजा माधव, कार्यक्रम प्रमुख, आकाशवाणी, गोरखपुर।
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