नवीन शैक्षिक सत्र से 130 विद्यालयों में चलेंगी स्मार्ट कक्षाएं
नए सत्र 2025-26 से जिले के 130 परिषदीय स्कूलों में आईआईटी मद्रास द्वारा सुझाई गई शिक्षा सामग्री के आधार पर स्मार्ट क्लास से पढ़ाई होगी। इससे करीब 17 हजार बच्चों को फायदा होगा।

- आईआईटी मद्रास की प्रवर्तन संस्था के प्रशिक्षकों ने डायट दिया में प्रशिक्षण
कानपुर देहात। नए सत्र 2025-26 से जिले के 130 परिषदीय स्कूलों में आईआईटी मद्रास द्वारा सुझाई गई शिक्षा सामग्री के आधार पर स्मार्ट क्लास से पढ़ाई होगी। इससे करीब 17 हजार बच्चों को फायदा होगा। सोमवार को पहले चरण में 130 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। मुख्य विकास अधिकारी लक्ष्मी एन के निर्देशन पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान पुखरायां में शिक्षकों को ऑनलाइन व स्मार्ट क्लास संचालन के तरीके और फायदे बताए गए। बताया गया कि आज के दौर के हिसाब से वे बच्चों को कैसे पढ़ा सकते हैं।
एसआरजी अनंत त्रिवेदी ने बताया कि राज्य परियोजना और आईआईटी मद्रास की प्रवर्तक संस्था से नि:शुल्क एमओयू किया गया है। इसके तहत शिक्षकों को स्मार्ट क्लास के लिए प्रशिक्षण मिलना शुरू हुआ है। प्रशिक्षण पाने वाले शिक्षक अपने सहयोगी शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करेंगे। एक अप्रैल से जब बच्चे स्कूल पहुंचेंगे तो स्मार्ट क्लास से पढ़ाई करेंगे।
आईआईटी मद्रास के परियोजना सलाहकार नागराजन ने कहा कि विद्या शक्ति योजना के तहत चलाए जा रहे हैं इस कार्यक्रम का उद्देश्य है कि यदि बच्चा विद्यालय तक ना पहुंच पाए तो विद्यालय बच्चे तक पहुंचे। तकनीकी की सहायता से डिजिटल युग में छोटे बच्चे रोचक तरीके से ज्यादा बेहतर पढ़ सकते हैं। इन्हें थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल कराने की जरूरत है। बच्चे जितना रटकर नहीं सीख सकते, उतना देखकर सीख सकते हैं।
जिला समन्वयक प्रशिक्षण सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि 130 स्कूलों में स्मार्ट क्लास, इंटरैक्टिव बोर्ड, डिस्प्ले व ऑडियो-विजुअल का सेटअप लगाया गया है। शहर में 1913 परिषदीय स्कूल हैं। इनमें से 130 में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था परियोजना द्वारा की गई है। इसके अलावा भी कंपोजिट ग्रांट से कई शिक्षकों ने स्मार्ट क्लास हेतु स्मार्ट टीवी और प्रोजेक्टर क्रय कर शिक्षण कार्य किया जा रहा है। इस दौरान आईआईटी मद्रास से डॉ शिवा, डायट से डॉ जगदंबा त्रिपाठी, संतोष कुमार, अरुण कुमार आदि उपस्थित रहे।
हाईटेक क्लास के फायदे
■ बच्चों को ऑडियो-वीडियो के जरिये पढ़ाया जा सकता है।
■ शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ बातचीत करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।
■ बच्चों को समझने में आसानी होगी, भूलने की संभावना कम रहेगी।
■ शिक्षक ने जो पढ़ाया होगा उसका डाटा सुरक्षित रहेगा।
■ शिक्षक विहीन कक्षा का भी संचालन आसानी से हो सकेगा।
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