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दादा महाराज मंदिर: श्रद्धालुओं का आस्था का प्रमुख केंद्र, शनिवारी दिन विशेष महत्व

नरसिहपुर शहर से करीब 6.5 किलोमीटर दूर स्थित दादा महाराज का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आस्था का केंद्र बन चुका है। यह मंदिर विशेष रूप से दादा महाराज के नाम से प्रसिद्ध है, जिन्हें यहां पूजा अर्चना में "दूल्हादेव" के रूप में पूजा जाता है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन करने और अपनी मन्नतों को पूरा करने के लिए आते हैं

नरसिहपु। नरसिहपुर शहर से करीब 6.5 किलोमीटर दूर स्थित दादा महाराज का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आस्था का केंद्र बन चुका है। यह मंदिर विशेष रूप से दादा महाराज के नाम से प्रसिद्ध है, जिन्हें यहां पूजा अर्चना में “दूल्हादेव” के रूप में पूजा जाता है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन करने और अपनी मन्नतों को पूरा करने के लिए आते हैं। मन्नतों का सकारात्मक परिणाम: यह माना जाता है कि दादा महाराज के मंदिर में की गई मन्नतों का सकारात्मक परिणाम देखने को मिलता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां अर्जी लगाने पर उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। विशेष रूप से शनिवार के दिन यहां दर्शन का खास महत्व माना जाता है, जिसके चलते इस दिन श्रद्धालुओं की भारी संख्या देखने को मिलती है।

नेशनल हाइवे को बदलने की घटना: मंदिर के इतिहास से जुड़ी एक दिलचस्प घटना यह है कि जब नेशनल हाइवे का निर्माण हो रहा था, तो मंदिर मार्ग के बीच में आ गया था। इस पर अधिकारियों द्वारा मंदिर को हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन इसके परिणामस्वरूप अप्रिय घटनाएं घटीं। इसके बाद, हाइवे को बदलकर मंदिर के पास से गुजारने का निर्णय लिया गया, और मंदिर यथावत बना रहा। इस मार्ग से गुजरने वाले लोग अक्सर यहां रुककर दर्शन करते हैं और अपनी यात्रा की कुशलता की कामना करते हैं। स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का अवसर: मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या ने स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं। कई स्थानीय लोगों ने फल, फूल, माला, प्रसाद और खाद्य सामग्रियों की दुकाने खोल ली हैं, जिससे उनकी आय का स्रोत बना है। इस कारण स्थानीय समुदाय को रोजगार मिल रहा है और मंदिर के आसपास का क्षेत्र भी समृद्ध हो रहा है।

कैसे पहुँचें दादा महाराज के मंदिर:

वायु मार्ग से: निकटतम हवाई अड्डा जबलपुर एयरपोर्ट है, जो डुमना एयरपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है। यह नरसिहपुर से लगभग 120 किमी दूर स्थित है।
ट्रेन द्वारा: नरसिहपुर रेलवे स्टेशन पश्चिमी मध्य रेलवे क्षेत्र में स्थित है और यह इटारसी से 84 किमी दूर है।
सड़क मार्ग से: नरसिहपुर रेलवे स्टेशन से नेशनल हाइवे 26 पर मंदिर तक 6 किलोमीटर की दूरी है।
दादा महाराज का मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह स्थानीय समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र बन चुका है।

anas quraishi
Author: anas quraishi

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