कानपुर देहातउत्तरप्रदेश

जबरदस्त बाढ़ की चपेट में ग्रामीण, अपनी जान बचाकर पलायन करने को मजबूर

तहसील के मूसा नगर क्षेत्र में नदी के किनारे भुंडा, भरदौली , रसूलपुर चतुरी पुरवा, अर्हन, पठार, अन्य कई गांव नदियों के किनारे बसे होने की वजह से जबरदस्त बाढ़ की चपेट में आ गए। जिसके चलते ग्रामीण अपनी जान बचाकर पलायन करने को मजबूर है।

Story Highlights
  • जीने के लिए पीना तो जरूरी है यह समझकर उस गंदे पानी को कपड़े से छानकर पीने को मजबूर है।
  • शासन-प्रशासन द्वारा कोई भी राहत सामग्री वह बाहर निकालने का कोई भी उचित इंतजाम नहीं किया जा रहा है।

पुखरायां,निर्भय सिंह यादव। तहसील के मूसा नगर क्षेत्र में नदी के किनारे भुंडा, भरदौली , रसूलपुर चतुरी पुरवा, अर्हन, पठार, अन्य कई गांव नदियों के किनारे बसे होने की वजह से जबरदस्त बाढ़ की चपेट में आ गए। जिसके चलते ग्रामीण अपनी जान बचाकर पलायन करने को मजबूर है। लेकिन उनके पास समस्या है इस बात की है कि वह गांव घर छोड़कर बाहर कैसे निकले उनके निकलने के लिए कोई भी रास्ता नहीं है.

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इस बाढ़ में कुछ तो बह गई है और कुछ पानी की वजह से समझ में नहीं आ रही जिसकी वजह से ग्रामीणों ने अपना बसेरा क्षेत्रों में बनाने को मजबूर हो गए लेकिन जानवरों के लिए वह कोई व्यवस्था नहीं कर पा रहे। जिसके चलते इन गांव के लोगों ने अपने जानवरों को आवारा पशुओं की तरह छोड़ दिया है वही जो छोटे जानवरों का तो पता ही नहीं कि वह इस बार में बैठ कर कहां चले गए। किसानों की फसलें बर्बाद हो गई घर में रखा अनाज भी बाढ़ में बह गया। खाने को  तो मजबूर हैं  ही सबसे बड़ी समस्या पानी पीने की है इन गांव में जो भी नलकूप या कुएं सारे पानी में डूबे हुए एकाद जो थोड़े बहुत दिख रहे हैं। उसमें इतना गंदा पानी आ रहा है कि पीने की इच्छा नहीं होती लेकिन जीने के लिए पीना तो जरूरी है यह समझकर उस गंदे पानी को कपड़े से छानकर पीने को मजबूर है। ताकि दो-चार दिन तक जीवित रह जा सके यदि प्रशासन द्वारा जल्द से जल्द कोई व्यवस्था ना की गई तो मरने तक की नौबत आ जाएगी। जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की ही होगी क्योंकि वहां पर अभी तक शासन-प्रशासन द्वारा कोई भी राहत सामग्री वह बाहर निकालने का कोई भी उचित इंतजाम नहीं किया जा रहा है।

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जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और भय व्याप्त वही भुण्डा गांव के पूर्व प्रधान हाकिम सिंह ने बताया यदि भुण्डा से सिहारी के बीच जो एक कच्चा श्रमदान है। यदि इसे पक्के निर्माण में तब्दील कर दिया जाए तो भविष्य में इन गांव के निकासी के लिए या आवागमन के लिए कोई भी असुविधा नहीं होगी। जिसकी मांग आसपास के ग्रामीणों ने लगातार विधायक के सांसदों से करते रहे हैं। लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। जिस वजह से हर वर्ष बाढ़ की चपेट में आने से क्षेत्र के करोड़ों का नुकसान होता रहता है। वहीं कुछ ग्रामीणों ने बताया कि 2 साल पहले भी इसी तरीके से बाढ़ आई हुई थी जिसमें सरकार द्वारा राहत राशि देने का वादा किया गया था जो आज तक प्राप्त नहीं हो सका है। सरकारों के द्वारा इसी तरीके से हमारे क्षेत्र की उपेक्षा की जाएगी तो हमें मजबूरन पलायन करना पड़ेगा या आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ेगा वही ग्रामीणों  का कहना है पांच दिन से फसे घरों में अभी तक कोई जिला प्रशासन का जिम्मेदार अधिकारी देखने नही आया न ही कोई खाने पीने की सामिग्री वितरित की गई पानी मे फसे सभी लोग भूख प्यास से मर रहे मबेसियो के लिये कोई चारा भूसा भी नही है।

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जानवर भी तड़प रहे नाराज ग्रामीण गया प्रसाद यादव, सुरेंद्र सिंह हरगोविंद गोविंद सिंह छुटकू, लाखन पिंटू, रामबाबू, रमेश यादव, पल्लू निषाद, कोमल निषाद ,लज्जाराम, रामनरायन, मनोजकुमार पुत्र सोबरन,सुन्दर ,शिवनरायन  नक्से , रामौतार सहित ग्राम वासियों ने नाराजगी जताते हुए समुचित व्यवस्था करवाने की मांग की है।

AMAN YATRA
Author: AMAN YATRA

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