छठी कक्षा से बच्चों को रोजगारपरक शिक्षा देने की तैयारी, नई शिक्षा नीति के तहत किए जा रहे कई बदलाव
परिषदीय विद्यालयों में छठवीं से ही रोजगारपरक शिक्षा देने की तैयारी है। 12वीं तक की पढ़ाई में उसे किसी न किसी व्यावसायिक कोर्स में हुनरमंद बना दिया जाएगा ताकि वह 12वीं पास होने के बाद अपना रोजगार शुरू कर सके। नई शिक्षा नीति 2020 और नेशनल कैरीकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) के अंतर्गत पाठ्यक्रम में बदलाव किया जा रहा है

- क्रेडिट के आधार पर होगी विद्यार्थियों की ग्रेडिंग
कानपुर देहात। परिषदीय विद्यालयों में छठवीं से ही रोजगारपरक शिक्षा देने की तैयारी है। 12वीं तक की पढ़ाई में उसे किसी न किसी व्यावसायिक कोर्स में हुनरमंद बना दिया जाएगा ताकि वह 12वीं पास होने के बाद अपना रोजगार शुरू कर सके। नई शिक्षा नीति 2020 और नेशनल कैरीकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) के अंतर्गत पाठ्यक्रम में बदलाव किया जा रहा है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव व्यवसायिक शिक्षा के स्तर पर हो रहा है। उद्देश्य है कि हर बच्चे को किसी न किसी क्षेत्र में हुनरमंद बनाया जाए। हुनरमंद बनाने के लिए बच्चे को छठवीं से ही उसकी जानकारी दी जाए। छठवीं से 12वीं तक बच्चे को तीन वर्ग में व्यवसायिक शिक्षा दी जाएगी। इसमें इन विषयों के बारे छठवीं से 10वीं तक बेसिक शिक्षा दी जाएगी। उसके बाद 11वीं और 12वीं में इसमें से किसी एक विषय में विशेषज्ञता की पढ़ाई कराई जाएगी। व्यावसायिक विषय के अंतर्गत दसवीं तक 31 और इंटरमीडिएट मे 44 विषय हैं। एनसीईआरटी के स्तर पर इन विषयों का पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है।
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