नीट परीक्षा में हुई धांधली का जारी है विरोध, सरकार ने साध रखी है चुप्पी
नीट परीक्षा में हुई धांधली का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। कभी एबीवीपी तो कभी एनएसयूआई तो कभी अन्य छात्र दल तो कहीं विपक्षी पार्टियों के नेता लगातार परीक्षा में हुई धांधली और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप एनटीए पर लगा रहे हैं। वे सरकार से भी नीट परीक्षा निरस्त कर दोबारा कराने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन सरकार इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार की मिलीभगत से ही इतने बड़े स्कैम को अमली जामा पहनाया गया

कानपुर देहात। नीट परीक्षा में हुई धांधली का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। कभी एबीवीपी तो कभी एनएसयूआई तो कभी अन्य छात्र दल तो कहीं विपक्षी पार्टियों के नेता लगातार परीक्षा में हुई धांधली और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप एनटीए पर लगा रहे हैं। वे सरकार से भी नीट परीक्षा निरस्त कर दोबारा कराने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन सरकार इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार की मिलीभगत से ही इतने बड़े स्कैम को अमली जामा पहनाया गया। जहां एक ओर नीट यूजी रिजल्ट को लेकर पूरे देश में आक्रोश दिखाई दे रहा है। जगह-जगह छात्र छात्राओं के प्रदर्शन की तस्वीर सामने आ रही है वहीं सरकार की तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की जा रही है।
आरोप है कि इस परीक्षा में बड़े स्तर पर धांधली हुई है। एक साथ 67 छात्रों के 100 प्रतिशत नंबर कैसे आ गए जिसे लेकर परीक्षा देने वाले लगभग 23 लाख छात्र इसका विरोध कर रहे हैं। अब इस प्रदर्शन में सियासी पारा भी बढ़ता जा रहा है। नीट परीक्षा जो देश की सबसे बड़ी, सबसे कठिन एक प्रतिष्ठित परीक्षा में शुमार है और इस परीक्षा को लेकर पूरे देश से लगभग 23 लाख बच्चों ने अपने भविष्य को सुरक्षित करने और भविष्य को संवारने को लेकर परीक्षा दी थी लेकिन परीक्षा परिणाम ने छात्र छात्राओं के मन में संशय पैदा कर दिया क्योंकि एक साथ 67 बच्चों के रिजल्ट में नंबरों के खेल ने एक बड़ी साजिश और धांधली का इशारा किया है जिसे अब अन्य छात्र स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
छात्रों ने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सैकड़ों याचिकाएं दायर कर रखी हैं लेकिन ये एजेंसियां भी सरकार के दबाव में कार्य कर रही हैं। मंगलवार को हुई सुनवाई में नीट काउंसलिंग पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट में इंकार कर दिया। अब सवाल यह उठता है अगर बच्चे काउंसलिंग करवा लेंगे और उन्हें मेडिकल कॉलेज एलॉट हो जाएगा तो वे वहां पर प्रवेश ले लेंगे उसके उपरांत अगर नीट परीक्षा को निरस्त किया जाता है तो क्या प्राइवेट मेडिकल कॉलेज वाले उन अभ्यार्थियों की धनराशि वापस कर देंगे। जहां सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का स्वत: ही संज्ञान लेना चाहिए था वहां अभ्यर्थियों द्वारा याचिका दायर करने के उपरांत भी जनहित में फैसला नहीं दिया जिससे अभ्यर्थियों में आक्रोश व्याप्त है।
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