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रोचक कहानी

सुरंग मे चीखती है अंग्रेज इंजीनियर की आत्मा

अमन यात्रा

एस0खान/शिमला। काली अंधेरी रात में जैसे ही ट्रेन सुरंग से गुजरने लगी तभी ट्रेन में बैठे लोगों को किसी के चीखने चिल्लाने की अजीब सी आवाजे सुनाई देने लगी। लोगों ने डर के कारण डिब्बों की खिडकी दरवाजे बंद कर लिए। सुरंग के अन्दर से आ रही आवाज इतनी भयानक थी कि लोगों की सांसे थम गईं। ट्रेन में बैठे यात्रियों में से कोई कांपने लगा तो किसी ने अपनी आंखे बंद कर ली तो किसी को ऐसा लग रहा था जैसे कोई उन पर हमला करने वाला हो। लोग कुछ समझ पाते कि आखिर माजरा क्या है ट्रेन के सुरंग पार करते ही ट्रेन में बैठे लोगों को सब कुछ सामान्य सा लगने लगा। ये चीखने चिल्लाने की आवाजे हर रात सुरंग से गुजरने वाली ट्रेन में सवार लोगों को सुनाई देती हैं। ये अजीब सी आवाज शिमला से कालका रेल लाइन की सुरंग नंबर 33 में हर रात एक अंग्रेज इंजीनियर की खौफनाक भटकती आत्मा की है जो रात में उस सुरंग से आती है। हिमाचल प्रदेश के शिमला की कालका शिमला रेल रूट पर बनी सुरंग न0 33 अंग्रेज इंजीनियर कर्नल बारोग की आत्मा उस सुरंग में चीखती चिल्लाती है। इसीलिए शिमला की सुरंग नंबर 33 को भूतिया सुरंग कहा जाता है।

भूतिया सुरंग के पीछे की कहानी

बात 1895 की है जब एक अंग्रेज इंजीनियर कर्नल बारोग जोकि ब्रिटिश कम्पनी में एक कर्नल व पेशे से एक इंजीनियर भी था। कम्पनी ने कर्नल बारोग को शिमला से कलकत्ता जाने वाले रेल लाइन के रास्ते में पडने वाले एक पहाडनुमा टीले से सुरंग बनाने का काम सौपा। कर्नल बारोग ने सुरंग की दो तरफ से शुरू की खुदाई करने से पहले पहाड़ का निरीक्षण किया और दो किनारों पर निशान लगवाये और काम पर लगे मजदूरों को दोनों किनारों से सुरंग खोदने के निर्देश दिये। उसका ऐसा अनुमान था कि खुदाई करते करते दोनों सुरंगें बीच में आकर मिल जायेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उसके इस कार्य से अंग्रेज हुकुमत को बहुत नुकसान और फजीहत हुई। तिलमिलाई अंग्रजी हुकुमत ने पैसे की बर्बादी करने का कर्नल बारोग पर 1 रुपए का जुर्माना ठोक दिया। उस समय 1 रूपये बहुत बडी रकम होती थी। इंजीनियर इस बात को लेकर बेहद परेशान हो गया और एक दिन अपने कुत्ते को लेकर सुबह टहलने निकला और उसी सुरंग के पास खुद को गोली मार ली जिस जगह पर इंजीनियर ने खुद को गोली मारी थी खून से सना इंजीनियर का शव घंटों तक वहीं पड़ा रहा। इंजीनियर की आत्महत्या का एक मात्र गवाह उसका कुत्ता था। कर्नल बारोग को अधूरी पडी उसी सुरंग के सामने ही दफना दिया गया। बारोग के बाद इसको पूरा कराने का काम एच एस हर्लिंगटन को सौंपा गया। सुरंग बनाने में उनकी मदद एक स्थानीय संत बाबा भालकू ने भी की। कहते हैं कि बाबा भालकू एक ज्योतिष के बहुत बडे जानकार थे उन्होंने ही बताया कि सुरंग की खुदाई कैसे और किस दिशा में की जाय और 1903 में सुरंग पूरी तरह बनकर तैयार हो गई। इसके बाद ऐसा कहा जाता है कि इस सुरंग में आज भी हर रात उस इंजीनियर की प्रेत आत्मा चीखती चिल्लाती है। इसीलिए इसे भारत की सबसे खौफनाक भूतिया सुरंग कहा जाता है।

चीखती है इंजीनियर की आत्मा

जनश्रुतियों में ऐसी चर्चा एंव स्थानीय लोगों का मानना है कि इस सुरंग में आज भी इंजीनयिर बारोग की आत्मा रात के अंधेरे में चीखती चिल्लाती हैं। सुरंग के पास रात में बेहद खौफनाक मंजर नजर आता है। लोग डर की वजह से सुरंग के आसपास रात में जाने की हिम्मत नही करते हैं। जिस किसी ने भी सुरंग के पास रात में जाने की कोशिश की तो उसे इंजीनियर की प्रेत आत्मा दबोचने का प्रयास करती है यही कारण है कि रात के वक्त इस सुरंग के पास कोई नहीं जाता है। स्थानीय लोगों का ऐसा भी दावा है कि रात को सुरंग के अंदर से किसी के कराहाने की आवाजें आती हैं। इस सुरंग के अंदर कुछ दूर चलने पर एक और सुरंग है जहां से अजीबो गरीब आवाजें आती हैं। वहां के बेहद डरावने महौल को देखते हुए सरकार ने उस सुरंग को बंद करने के लिये लोहे का दरवाजा भी लगाया लेकिन एक दिन लोगों को अचानक सुरंग के दरवाजे का ताला टूटा मिला कहते हैं तब से इंजीनियर की आत्मा सुरंग में खुलेआम घूमती है। सुरंग के अन्दर से इंजीनियर की आत्मा के चीखने चिल्लाने कराहने की खौफनाक आवाजें रात के अंधेरे में सुनी जा सकती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अगर देखे तो असल में जब कोई ट्रेन किसी सुरंग के अन्दर से गुजरती है तो उसकी आवाज में परिवर्तन हो जाता है ऐसा इसलिए होता है जब ट्रेन की आवाज सुरंग की दीवारों से टकराती है तो एक अजीब सी आवाज पैदा होती है जिससे ट्रेन में बैठे लोगों को किसी के चिल्लाने चीखने का भ्रम होता है और लोग उसे किसी आत्मा के चिल्लाने कराहने की आवाज समझ लेते है और शायद यही सब कुछ शिमला की बारोग सुरंग में होता हैं जहां कहा जाता हैं कि सुरंग में आज भी इंजीनियर की आत्मा चीखती चिल्लाती है।

-इस स्टोरी में किसी तरह की सत्यता का दावा नही किया जाता है यह सिर्फ जनश्रुतियों पर आधारित है.

 

 

 

AMAN YATRA
Author: AMAN YATRA

SABSE PAHLE

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