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अप्रशिक्षित प्रधानाध्यापक जूनियर शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह के पदोन्नति की होगी जांच

वित्त एवं लेखाधिकारी शिवा त्रिपाठी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को अप्रशिक्षित शिक्षकों की पदोन्नति के मामले को लेकर एक पत्र लिखा है जिसमें सभी शासनादेशों एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए ऐसे शिक्षकों की पदोन्नति की जांच करने को कहा है जिनकों कि प्रोन्नति नियम के विरुद्ध प्रदान की गई है।

अमन यात्रा , कानपुर देहात। वित्त एवं लेखाधिकारी शिवा त्रिपाठी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को अप्रशिक्षित शिक्षकों की पदोन्नति के मामले को लेकर एक पत्र लिखा है जिसमें सभी शासनादेशों एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए ऐसे शिक्षकों की पदोन्नति की जांच करने को कहा है जिनकों कि प्रोन्नति नियम के विरुद्ध प्रदान की गई है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की अवमानना करते हुए दिनांक 27 जुलाई 2015 को पदोन्नति सूची में क्रम सं. 331 पर अंकित अशोक कुमार सिंह को प्र०अ० उ०प्रा०वि० नेवादा बारा वि०ख० मैथा के पद पर पदोन्नति प्रदान की गई जबकि अशोक कुमार सिंह को मृतक आश्रित के रूप में अप्रशिक्षित सहायक प्रा०वि० के पद पर कार्यालय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कानपुर देहात के द्वारा जारी आदेश पत्र सं.15-100/87-88 दिनांक 03 अप्रैल 1987 के द्वारा नियुक्ति प्रदान की गयी थी और इनके द्वारा आज तक बीटीसी का कोई भी प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया गया हैं जबकि अप्रशिक्षित व्यक्ति को पदोन्नति दिए जाने का कोई भी प्रावधान नहीं है। इस परिप्रेक्ष्य में दिनेश कुमार तिवारी स०अ० उच्च प्रा०वि० हरिहरपुर वि०ख० राजपुर कानपुर देहात ने भी माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में रिट याचिका सं. 54501/2015 दायर की हुयी हैं।अतः उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में यह आवश्यक है कि तत्काल जाँच समिति गठित कर इस प्रकरण की जांच करवाई जाए जिससे प्रधानाध्यापक अशोक कुमार सिंह की वास्तविक वरिष्ठता का निर्धारण किया जा सके और माननीय सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना से बचा जा सके साथ ही यदि त्रुटिपूर्ण वरिष्ठता की स्थिति पायी जाती हैं तो समय रहते पदावनत और वेतन वसूली की कार्यवाही सम्पादित की जा सके। उक्त प्रकरण में किसी भी अनियमित / अधिक भुगतान की सम्भावना के दृष्टिगत यह नितान्त आवश्यक है कि तत्काल जाँच समिति गठित कर उक्त शिक्षक के समस्त शैक्षिक, सेवा संबंधी प्रकरणों तथा अभिलेखों की विस्तृत विभागीय जांच करा ली जाये जिससे अशोक कुमार सिंह की नियुक्ति तथा पदोन्नति का आधार स्पष्ट हो सके जाँच पूरी होने तक उक्त शिक्षक के वेतन आहरण पर तत्काल रोक लगा देना उचित होगा जिससे किसी भी प्रकार की अनियमित भुगतान एवं वित्तीय अनियमितता से बचा जा सके तथा जांच में दोषी पाये जाने पर पदावनत वेतन वसूली एवं नियमानुसार विभागीय कार्यवाही सम्पादित कराई जा सके। अनुरोध है कि समस्त कार्यवाही शीघ्र अतिशीघ्र पूर्ण करा ली जाये और कार्यालय को जांच आख्या उपलब्ध कराई जाए ताकि अग्रिम कार्यवाही की जा सके।

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बताते चलें केंद्र सरकार ने शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून के तहत राज्यों को शिक्षकों की नियुक्ति एवं उनकी पदोन्नति के संबंध में कई बार स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं उसके बावजूद कई प्रदेशों में अप्रशिक्षित शिक्षक शिक्षण कार्य कर रहे हैं। केन्द्र सरकार ने ऐसे शिक्षकों को निर्धारित समय सीमा के अंदर प्रशिक्षित करने के सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए थे साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया था कि अप्रशिक्षित शिक्षक स्कूलों में शिक्षण कार्य नहीं कर सकते अगर निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत अप्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया जाता है तो उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा उसके बाद भी कई प्रदेशों में अप्रशिक्षित शिक्षक शिक्षण कार्य कर रहे हैं यहां तक कि हाल ही में विहार में हाईकोर्ट ने अप्रशिक्षित शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाने के निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं। इसके साथ ही अप्रशिक्षित शिक्षकों की पदोन्नति का प्रावधान भी नहीं है एवं ऐसे समस्त अप्रशिक्षित शिक्षक जिनके द्वारा दो वर्षीय बीटीसी प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया गया है उनकी ज्येष्ठता नियमित प्रशिक्षित वेतनमान प्राप्त होने की तिथि से जोड़ी जानी है।

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वहीं इस मामले में उच्च प्राथमिक विद्यालय नेवादा बारा विकासखंड मैंथा के प्रधानाध्यापक अशोक कुमार सिंह का कहना है कि वह किसी भी स्तर की जाँच कराने को तैयार है। सत्यता सामने आ जायेगी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अभी पत्र की जानकारी नहीं है लेकिन वित्त एवं लेखाधिकारी ने यदि ऐसा पत्र बीएसए को लिखा है तो वह जाँच को तैयार है। अशोक कुमार सिंह ने कहा कि वह जूनियर शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष है। वित्त एवं लेखा विभाग में समस्याओं एवं अनियमितताओं की उन्होंने आवाज उठायी थी सम्भवता उसी द्वेष भावना से मेरे ऊपर इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाये गये हैं। उन्होने कहा 31/04/1997 को एक शासनादेश जारी हुआ था जिसमें उल्लेख किया गया था कि मृतक आश्रित में नौकरी करने वाले ऐसे शिक्षक जिनकी सेवायें 5 वर्ष या इससे अधिक हो चुकी हैं। वह बीटीसी प्रशिक्षण से मुक्त रहेगें और इसी आधार पर उनका प्रमोशन हुआ था क्योंकि उनकी नियुक्ति 3/4/1987 को हुई है और शासनादेश के कारण उन्हें बीटीसी से मुक्त रखा गया है।

 

AMAN YATRA
Author: AMAN YATRA

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