कानपुर के बाजारों में देखने को मिल रहीं मां दुर्गा की ईको फ्रेंडली प्रतिमाएं, कोलकाता और राजस्थान के मूर्तिकार दे रहे स्वरूप
बप्पा की विदाई के बाद अब मां दुर्गा के आगमन की तैयारियां शहर में शुरू हो गई हैं। नवरात्र पर्व सात से 14 अक्टूबर के बीच भक्तों द्वारा मनाया जाएगा। गणेशोत्सव के बाद शहर के मूर्तिकार जोरों पर नवरात्र की तैयारियां कर रहे हैं। मूर्तिकार गणेशोत्सव की तर्ज पर नवरात्र के लिए मां की ईको फ्रेंडली प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं। शहर से आसपास के कई जिलों में मां के महिषासुर मर्दिनी रूप की प्रतिमाएं जाती हैं।

कानपुर, अमन यात्रा । बप्पा की विदाई के बाद अब मां दुर्गा के आगमन की तैयारियां शहर में शुरू हो गई हैं। नवरात्र पर्व सात से 14 अक्टूबर के बीच भक्तों द्वारा मनाया जाएगा। गणेशोत्सव के बाद शहर के मूर्तिकार जोरों पर नवरात्र की तैयारियां कर रहे हैं। मूर्तिकार गणेशोत्सव की तर्ज पर नवरात्र के लिए मां की ईको फ्रेंडली प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं। शहर से आसपास के कई जिलों में मां के महिषासुर मर्दिनी रूप की प्रतिमाएं जाती हैं।
कोरोना संक्रमण के चलते लंबे समय से बेरोजगार बैठे मूर्तिकारों के लिए गणेशोत्सव के बाद नवरात्र उम्मीद की किरण लेकर आया है। शहर में ज्यादातर मूर्तिकार राजस्थान व कोलकाता से आकर मां की प्रतिमाओं को आकार देते हैं। साकेत नगर स्थित महाकालेश्वर मूर्ति भंडार के हरिकृष्ण शुक्ला के मुताबिक कुछ आर्डर आना शुरू हो गए हैं। इस बार भक्त पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखते हुए इको फ्रेंडली प्रतिमाओं के आर्डर दे रहे हैं। प्लास्टर आफ पेरिस के स्थान पर मिट्टी की प्रतिमाएं भक्तों को पसंद आ रही है। इस बार मां के शेर पर विराजमान और महिषासुर मर्दिनी रूप की छोटी प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं। जिसके दाम सात सौ रुपये से लेकर डेढ़ हजार तक है। मूर्तिकारों के मुताबिक साकेत नगर के न्यू कलकत्ता मूर्ति कला केंद्र के शंभू ने बताया कि शहर से फर्रुखाबाद, प्रयागराज, लखनऊ, झांसी, फतेहपुर, जालौन, उन्नाव, रायबरेली सहित कई जिलों में मां की प्रतिमाएं शहर से जाती हैं। मां के महिषासुर मर्दिनी रूप की बड़ी प्रतिमाओं को विशेष आर्डर पर बनाई जाती हैं।
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