
निकाय चुनाव मतदान में मात्र 13 दिन बाकी, लेकिन शुरू हो चुकी है सियासी झांकी
-चुनाव चिन्ह का आवंटन होते ही डोर टू डोर प्रचार में जुटे अध्यक्ष व सदस्य पद के प्रत्याशी
-बीजेपी व सपा में स्थानीय निकाय चुनाव में होगी जबरदस्त टक्कर
चकिया, चंदौली। निकाय चुनाव मतदान में मात्र 13 दिन बाकी, लेकिन शुरू हो चुकी है सियासी झांकी…..। प्रथम चरण का निकाय चुनाव मतदान 4 मई को होने वाला है। जिसे लेकर राजनीतिक पार्टियों ने अपनी सियासी झांकियां निकालनी शुरू कर दी है। वही पार्टियों द्वारा चुने गए अध्यक्ष और सदस्य पद के प्रत्याशी डोर टू डोर जाकर लोगों से मिलने का दौर शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि स्थानीय निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी में कांटे की टक्कर होगी। सिंबल का आवंटन होते ही सभी प्रत्याशी जनसंपर्क में जुट गए। भारतीय जनता पार्टी द्वारा घोषित अध्यक्ष पद के प्रत्याशी गौरव श्रीवास्तव ने शुक्रवार को नगर के विभिन्न वार्डों में डोर टू डोर जाकर लोगों से जनसंपर्क किया। संपर्क के दौरान अपने पक्ष में वोट करने की लोगों से अपील भी किया।
13 दिन की सियासी झांकी में अब देखना है कि कौन कितना पसीना बहाकर अपनी सियासी झांकी को सजाते हुए लोगों के दिलों पर जमाता है कब्जा। 4 मई को निकाय चुनाव का मतदान होगा। शुक्रवार को सिंबल का भी आवंटन कर दिया गया। सिंबल का आवंटन होते ही पार्टियों द्वारा घोषित प्रत्याशी अध्यक्ष व सदस्य पूरी तरह डोर टू डोर जाकर जनसंपर्क में पसीना बहाते हुए देखे गए। तो वहीं भारतीय जनता पार्टी द्वारा घोषित अध्यक्ष पद के प्रत्याशी गौरव श्रीवास्तव ने नगर के विभिन्न वार्डों में डोर टू डोर जन संपर्क करते हुए देखे गए। गौरव श्रीवास्तव जनसंपर्क के दौरान लोगों से अपने पक्ष में वोट करने का अपील किया। लोगों से उन्होंने जनसंपर्क के दौरान बहुत सारे वादे भी किए, जिनको पूरा करने के लिए गौरव श्रीवास्तव दृढ़संकल्पित भी हैं। इसी तरह अन्य पार्टी के अध्यक्ष पद व सदस्य पद के प्रत्याशी भी सुबह शाम लोगों के बीच डोर टू डोर जाकर पसीना बहाते हुए देखे जा रहे हैं। अब यह देखना है कि 13 दिनों में सियासी झांकी कौन सजाते हुए नगर के लोगों के दिलों पर कब्जा जमाता है। मीडिया के सर्वे में नगर के लोगों ने बताया कि स्थानीय नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी व समाजवादी पार्टी की जबरदस्त लड़ाई है। जिससे सियासी पारा प्रतिदिन उतार, चढ़ाव पर दिख रहा है। स्थानीय लोग यह भी नहीं अंदाजा लगा पा रहे हैं कि किस पार्टी का पलड़ा भारी है।
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