जनरल मोटर्स इंडिया ने तालेगांव प्लांट के 1419 वर्कर्स को नौकरी से निकाला- रिपोर्ट
जनरल मोटर्स इंडिया ने पुणे के बाहरी इलाके में स्थित अपने तालेगांव प्लांट में काम करने वाले 1419 वर्कर्स नौकरी से निकाल दिया. कंपनी ने ईमेल के जरिए सभी 1419 श्रमिकों को ले-ऑफ नोटिस भेजा है और उसकी एक कॉपी जनरल मोटर्स कर्मचारी यूनियन के सचिव और अध्यक्ष को दी गई है.

कार निर्माता कंपनी ने एक ईमेल के जरिए सभी 1419 श्रमिकों को ले-ऑफ नोटिस भेजा है और उसकी एक कॉपी जनरल मोटर्स कर्मचारी यूनियन के सचिव और अध्यक्ष को दी गई है. कंपनी का कहना है कि वर्कफोर्स को औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 25-सी के तहत क्षतिपूर्ति मुआवजा मिलेगा. उन्हें मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 50 प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा.
सेपरेशन पैकेज पर नहीं बनी बात
जनरल मोटर्स के इंटरनेशनल डायरेक्टर फॉर कम्युनिकेशन जॉर्ज ने ईटी को बताया कि कंपनी ने पिछले चार महीनों में कोई भी वाहन नहीं बनाने के बावजूद कर्मचारियों का भुगतान जारी रखा है. उन्होंने आगे कहा कि “हमने कर्मचारियों को वैधानिक आवश्यकता से अधिक में एक सेपरेशन पैकेज की पेशकश की है. अफसोस की बात है कि यूनियन ने सेपरेशन पैकेज पर नेगोशिएशन करने से इनकार कर दिया है. इसलिए कंपनी उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों अपनाने के लिए मजबूर हुई है.”
दिसंबर से बंद है प्रोडक्शन
प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी के तालेगांव प्लांट में 24 दिसंबर, 2020 को प्रोडक्शन बंद हो गया था. उन्होंने दावा किया कि कंपनी ने उत्पादन बंद करने के संबंध में अपने कर्मचारियों को एक साल से पहले ही सूचना दी थी और साइट पर उत्पादन फिर से शुरू करने की कोई संभावना नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि कार कंपनी दिसंबर 2020 से प्रोडक्शन जीरो के बावजूद कर्मचारियों के वेतन के लिए 10 करोड़ का मासिक खर्च कर रही है. उन्होंने आगे कहा कि प्लांट ऑपरेशन रोकने के लिए सभी संबंधित सरकारी अप्रवूल ली जा रही हैं.
यूनियन देगी चुनौती
जनरल मोटर्स इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष संदीप भेगडे ने के अनुसार, यूनियन संबंधित अथॉरिटीज में इसे चेलैंज करेगा. हम विभिन्न प्लेटफार्मों पर अपने अधिकारों के लिए लड़ते रहेंगे. ”
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